पितृ कर्म: तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान
पितरों को याद क्यों किया जाता है, इसके लिए वर्ष के कौन-से दिन हैं, घर पर विधि कैसे करें, विदेश में रहने वाले परिवार क्या करें, और वे तीर्थ जहाँ परिवार जाते हैं।
श्राद्ध तिथि खोजें
आगामी पितृ तिथियाँ
आपके शहर के लिए निकाली गई।
मार्गदर्शिकाएँ
पितरों का स्मरण: श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान
हिंदू परंपरा में पितरों का स्मरण क्यों होता है, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पितृ पक्ष का अर्थ क्या है, और हर विषय का लेख कहाँ मिलेगा।
पितृ पक्ष: पितरों का पखवाड़ा
पितृ पक्ष क्या है, किस पितर का श्राद्ध किस तिथि को करें, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या जैसे विशेष दिन, और परंपरा में क्या वर्जित माना जाता है।
वर्ष भर में पितरों के स्मरण के दिन
मासिक अमावस्या और वार्षिक श्राद्ध से लेकर संक्रांति, अक्षय तृतीया और ग्रहण तक, तर्पण और श्राद्ध के अवसरों की पूरे वर्ष की सूची।
तर्पण विधि: घर पर पितरों को जल अर्पण
घर पर किया जा सकने वाला चरण-दर-चरण तर्पण: सामग्री, दिशाएँ, जनेऊ की स्थितियाँ, पिता और ननिहाल की ओर के अर्पण, और संक्षिप्त रूप।
पिंडदान विधि: पिंडों का अर्पण
पिंड क्या है, सामग्री, अर्पण के चरण, विष्णु और गया का संबंध, ब्राह्मण भोजन और दान, और पिंडों का बाद में क्या करें।
विदेश में श्राद्ध
भारत से बाहर रहने वाले परिवार घर या मंदिर में पितृ कर्म कैसे करें: अपने शहर का पंचांग, नदी के बिना व्यवस्था, पुरोहित, कार्य-दिवस और गया की यात्रा तक का मार्ग।
श्राद्ध और तर्पण कौन कर सकता है
परंपरा से कौन अधिकारी है, पुत्री और पत्नी की भूमिका, पुत्र न होने पर क्या करें, तिथि अज्ञात होने पर, मित्र, निराश्रित पितर और अशौच के नियम।
पितृ कर्म: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से जुड़े सामान्य प्रश्नों के छोटे उत्तर: पुरोहित, समय, भोजन, छूटे वर्ष, सौतेले माता-पिता और पितृ दोष।
तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के पवित्र स्थान
कब जाएँ, वहाँ क्या किया जाता है और यात्रा की योजना कैसे बनाएँ। सभी स्थान देखें
गया, बिहार
गया भारत में पिंडदान का सबसे प्रसिद्ध स्थान है, जहाँ परिवार विष्णुपद, फल्गु नदी और अक्षयवट पर अपने पितरों को पिंड अर्पित करते हैं।
Prayagraj, Uttar Pradeshप्रयागराज, उत्तर प्रदेश
जहाँ गंगा और यमुना मिलती हैं, वह प्रयागराज का त्रिवेणी संगम तर्पण और श्राद्ध का पूजनीय स्थान है और परंपरा में गया से पहले का पड़ाव माना जाता है।
Varanasi (Kashi), Uttar Pradeshवाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश
गंगा किनारे बसी काशी (वाराणसी) तर्पण और श्राद्ध के लिए पूजनीय है, और पिशाचमोचन कुंड त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए जाना जाता है।
Haridwar, Uttarakhandहरिद्वार, उत्तराखंड
जहाँ गंगा पहाड़ों से उतरती है, वह हरिद्वार कुशावर्त घाट, हर की पौड़ी और नारायणी शिला पर तर्पण और श्राद्ध का बड़ा तीर्थ है।
Badrinath and Brahma Kapal, Uttarakhandबद्रीनाथ और ब्रह्मकपाल, उत्तराखंड
अलकनंदा के तट पर बद्रीनाथ मंदिर के पास स्थित ब्रह्मकपाल पिंडदान के लिए पूजनीय है; यहाँ वसंत से शीत ऋतु के आरंभ तक ही जाया जा सकता है।
Ujjain, Madhya Pradeshउज्जैन, मध्य प्रदेश
क्षिप्रा के तट पर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी उज्जैन में राम घाट और सिद्धवट पर तर्पण और श्राद्ध की परंपरा है।