पोइला बोइशाख (बंगाली नववर्ष)

Poila Boishakh (Bengali New Year)

पोइला बोइशाख बोइशाख मास के पहले दिन का बंगाली नववर्ष है, जो नए कपड़े, विशेष भोजन, मेले और नए बही-खाते खोलने के साथ मनता है।

देवता: गणेश और लक्ष्मी (व्यापारी घरों में); सामुदायिक पर्वअवधि: एक दिनऋतु: वसंत, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का समयअन्य नाम: पोहेला बोइशाख, नबो बोर्षो, बंगाली नववर्ष

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तारीख़पर्व या अवसर
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026मेष संक्रांति
बुधवार, 14 अप्रैल 2027मेष संक्रांति
गुरुवार, 13 अप्रैल 2028मेष संक्रांति

परिचय

पोइला बोइशाख का अर्थ है "बोइशाख का पहला दिन"। यह बंगाली नववर्ष है, जो पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, बांग्लादेश (जहाँ इसे पोहेला बोइशाख कहते हैं) और दुनिया भर के बंगालियों में मनाया जाता है। इसे नबो बोर्षो, यानी नया वर्ष, भी कहते हैं।

बंगाली पंचांग सौर है, इसलिए नववर्ष तब आता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। बांग्लादेश के संशोधित राष्ट्रीय पंचांग में यह ईसवी कैलेंडर की एक निश्चित तारीख़ पर पड़ता है, जबकि पश्चिम बंगाल में परंपरागत पंचांग से तय होने के कारण एक दिन आगे-पीछे हो सकता है। पोइला बोइशाख उन थोड़े पर्वों में है जिन्हें हर धर्म के बंगाली साथ मनाते हैं।

महत्व और कथाएँ

बंगाब्द का वर्ष पोइला बोइशाख को बदलता है और ईसवी वर्ष से 593 या 594 कम होता है। इस संवत् के आरंभ पर मतभेद है: कुछ इसे मुगल बादशाह अकबर के राजस्व सुधार से जोड़ते हैं, जिसमें कर-वर्ष फसल से बाँधा गया, और कुछ प्राचीन राजा शशांक से। विद्वान एकमत नहीं हैं।

खेती और व्यापार से पुराना संबंध दिन की रीतियाँ समझाता है। व्यापारी पुराने खाते बंद करके नए खोलते थे। इसी से हालखाता बना, यानी नया बही-खाता, जिसमें दुकानदार वर्ष की पहली प्रविष्टि प्रायः छोटी प्रार्थना के साथ लिखते हैं और ग्राहकों को मिठाई खिलाते हैं। अनेक बंगालियों के लिए यह सांस्कृतिक पहचान का दिन भी है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर का बोइशाख के स्वागत का प्रसिद्ध गीत इस दिन गाया जाता है।

पूजा विधि

  1. एक दिन पहले घर और दुकान साफ़ करें। द्वार पर चावल की लेई से अल्पना बनाएँ।
  2. सुबह स्नान करके नए कपड़े पहनें। अनेक स्त्रियाँ लाल किनारी की सफ़ेद साड़ी और पुरुष पंजाबी कुर्ता पहनते हैं।
  3. दीप जलाकर कुलदेवता को फूल और मिठाई अर्पित करें, और जहाँ रीति हो, बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लें। फिर मंदिर जाएँ; अनेक लोग काली मंदिर में वर्ष की पहली प्रार्थना करते हैं।
  4. व्यापारी परिवार नया बही-खाता सजाते हैं, उस पर शुभ चिह्न या गणेश और लक्ष्मी के नाम लिखकर पहली प्रविष्टि करते हैं।
  5. परिवार और अतिथियों के साथ उत्सव का भोजन करें।
  6. स्थानीय मेले में जाएँ और गीत, कविता और नृत्य का आनंद लें।

परंपराएँ परिवार और स्थान के अनुसार बदलती हैं; अपनी रीति मानें।

पूजन सामग्री

  • अल्पना के लिए चावल की लेई
  • दीप, घी या तेल, धूप और कपूर
  • अर्पण के लिए फूल, मिठाई और फल
  • नए बही-खाते के लिए चंदन, सिंदूर और बही-खाता
  • अतिथियों के लिए संदेश (बंगाली मिठाई), रसगुल्ला और मिष्टी दोई

व्रत और भोजन

पोइला बोइशाख भोज का दिन है। बांग्लादेश में प्रसिद्ध परंपरागत नाश्ता पांता भात है, यानी पानी में भिगोया चावल, जो तले इलिश (हिलसा मछली), हरी मिर्च, प्याज और दाल के साथ खाया जाता है। पश्चिम बंगाल में हिंदू परिवार अपनी रीति से शाकाहारी या मछली का भोजन बनाते हैं, जिसमें लुचि, आलू दम, शुक्तो (हल्की कड़वी सब्ज़ी) और मिठाइयाँ होती हैं। वैष्णव या शाकाहारी परंपरा वाले घर भोजन शाकाहारी रखते हैं।

बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ तथा दवा लेने वाले लोग भोजन के बारे में चिकित्सक की सलाह मानें।

क्या करें

  • नए या स्वच्छ पारंपरिक कपड़े पहनें।
  • बड़ों से मिलकर उनका आशीर्वाद लें।
  • पड़ोसियों, सहकर्मियों और मित्रों को मिठाई बाँटें।
  • घर साफ़ करें और द्वार पर अल्पना बनाएँ।
  • बच्चों को टैगोर का कोई गीत या कविता सिखाएँ।
  • व्यापार करते हों तो वर्ष का नया बही-खाता या नया पन्ना खोलें।

क्या न करें

  • इस पर झगड़ा न करें कि नववर्ष एक दिन पहले है या बाद में; दोनों अपने-अपने स्थान पर मान्य हैं।
  • उत्सव के भोजन में अन्न व्यर्थ न करें।
  • अतिथियों पर मछली या मांस खाने या छोड़ने का दबाव न डालें।
  • अकेले रहने वाले बुज़ुर्ग रिश्तेदारों को न भूलें।
  • दीप को बिना देखे जलता न छोड़ें।

क्षेत्रीय परंपराएँ

ढाका में पोहेला बोइशाख पर मंगल शोभायात्रा निकलती है, जिसे अधिकतर विवरणों के अनुसार ढाका विश्वविद्यालय के चारुकला संस्थान के विद्यार्थियों ने आरंभ किया। उसमें रंगीन मुखौटे और आकृतियाँ होती हैं, और यूनेस्को ने उसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में स्थान दिया है।

पश्चिम बंगाल में नववर्ष की सुबह अनेक लोग कोलकाता के कालीघाट जैसे मंदिरों में जाते हैं। एक दिन पहले, चोइत्रो के अंतिम दिन, अनेक गाँवों में चरक या गाजन होता है, जो लोकसंगीत वाला शिव-उत्सव है। लगभग इसी समय पुथांडु, विशु, बोहाग बिहू और बैसाखी भी मनते हैं।

आज के समय में

बड़े नगरों में बंगाली संगठन और मंदिर नववर्ष के आसपास सप्ताहांत पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, उत्सव का भोजन और मेले रखते हैं। विदेश में बसे परिवार भी यही करते हैं।

दिन काम का हो तो घर पर छोटा उत्सव रखें: नए कपड़े, विशेष नाश्ता, परिवार को फ़ोन और शाम को मंदिर-दर्शन। मिठाइयाँ और बंगाली सामग्री बाज़ार में मिल जाती हैं। अल्पना थाली में चावल के आटे से बना लें।

संबंधित पृष्ठ

परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।

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