रक्षा बंधन
Raksha Bandhan
श्रावण पूर्णिमा पर भाई-बहन के स्नेह का पर्व, जब बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और भाई रक्षा तथा साथ निभाने का वचन देते हैं।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 | रक्षा बंधन |
| मंगलवार, 17 अगस्त 2027 | रक्षा बंधन |
| शनिवार, 5 अगस्त 2028 | रक्षा बंधन |
परिचय
रक्षा बंधन भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव है। "रक्षा" का अर्थ है बचाव और "बंधन" का अर्थ है बाँधने वाला सूत्र। बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है, माथे पर तिलक लगाती है, मिठाई खिलाती है और उसकी कुशलता की प्रार्थना करती है। भाई उपहार देता है और उसकी देखभाल का वचन देता है। आज यह पर्व बहनों के बीच, भाइयों के बीच, चचेरे-ममेरे भाई-बहनों, मित्रों और परिवार जैसे संबंधियों में भी मनाया जाता है।
यह श्रावण पूर्णिमा को आता है, और पूर्णिमान्त तथा अमान्त दोनों गणनाओं में तिथि वही रहती है। इसी दिन महाराष्ट्र में नारळी पूर्णिमा और दक्षिण भारत में, कई यजुर्वेदी परिवारों में, अवनि अवित्तम मनाई जाती है। उत्तर भारत के कुछ विप्र परिवार भी इस दिन श्रावणी उपाकर्म करते हैं, जिसमें यज्ञोपवीत बदला जाता है; वेद-शाखा और पंचांग के अनुसार इसका दिन अलग भी हो सकता है।
महत्व और कथाएँ
इसके बारे में कई कथाएँ कही जाती हैं। एक में इंद्राणी ने दानवों से युद्ध से पहले इंद्र की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधा। दूसरी में द्रौपदी ने कृष्ण की घायल उँगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बाँधा और कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया। तीसरी में देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बाँधी और विष्णु को वापस ले आईं। रानी कर्णावती द्वारा हुमायूँ को राखी भेजने की कथा भी लोकप्रिय है, पर इतिहासकार उसके ब्योरे पर संदेह करते हैं।
सभी कथाओं का भाव एक है: प्रेम और विश्वास का वह धागा जो रक्त के संबंध से आगे जाता है। यह पर्व परिवार में आपसी ज़िम्मेदारी की याद भी दिलाता है।
पूजा विधि
- पंचांग में राखी बाँधने का सही समय देखें। भद्रा में राखी न बाँधें, क्योंकि शास्त्रों में इस कर्म के लिए भद्रा वर्जित कही गई है। परंपरा में अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना जाता है और उसके अभाव में प्रदोष काल।
- स्नान करके स्वच्छ या नए वस्त्र पहनें। बहन थाली सजाती है, जिसमें राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल या मेवे रहते हैं।
- भाई-बहन साथ बैठें और कुलदेवता को प्रणाम करें।
- बहन दीप जलाकर भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाती है।
- वह भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है और प्रायः यह श्लोक पढ़ती है: "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥" स्रोतों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।
- फिर आरती उतारकर मिठाई खिलाती है।
- भाई उपहार या आशीर्वाद देता है और साथ निभाने का वचन देता है।
- पूरा परिवार साथ भोजन करता है।
पूजन सामग्री
- राखी (रेशम, सूत या पर्यावरण-अनुकूल धागे की)
- रोली, अक्षत, हल्दी
- दीपक, धूप, कपूर
- मिठाई, मेवे या नारियल
- सजी हुई थाली
- बहन के लिए छोटा उपहार या लिफ़ाफ़ा
व्रत और भोजन
कठोर व्रत नहीं होता, पर बहुत-सी बहनें राखी बाँधने तक कुछ नहीं खातीं, और कभी भाई भी। बाद में शाकाहारी भोजन होता है, जिसमें खीर, घेवर, बर्फ़ी और सेवइयाँ जैसी मिठाइयाँ रहती हैं। बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार, दवा लेने वाले और गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाएँ उपवास उतना ही रखें जितना डॉक्टर की सलाह से ठीक हो; हल्का व्रत भी मान्य है।
क्या करें
- शुभ समय देखें और राखी के लिए भद्रा से बचें।
- हो सके तो सादी, प्लास्टिक-रहित राखी चुनें।
- मिठाई और सच्चे आशीर्वाद के साथ पर्व मनाएँ।
- सभी भाई-बहनों और चचेरे-ममेरे संबंधियों को शामिल करें।
- जो दूर हैं, उन्हें फ़ोन या वीडियो कॉल से याद करें।
- सोच-समझकर उपहार दें, दिखावे से नहीं।
- बड़ों से मिलने जाएँ या फ़ोन पर आशीर्वाद लें।
क्या न करें
- भद्रा और वर्जित समय में राखी न बाँधें।
- उपहार को प्रेम का पैमाना न बनाएँ।
- गुस्से में राखी तोड़ें या उतारें नहीं।
- पारिवारिक मनमुटाव के कारण किसी को पर्व से बाहर न रखें।
- पूजा की थाली में बासी या अशुद्ध वस्तुएँ न रखें।
- बच्चों के सामने रस्म का मज़ाक न उड़ाएँ।
क्षेत्रीय परंपराएँ
महाराष्ट्र में नारळी पूर्णिमा पर समुद्र को नारियल अर्पित किया जाता है। गुजरात में इसे बळेव कहते हैं और ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा। नेपाल में जनै पूर्णिमा मनाई जाती है। राजस्थान में भाभी की चूड़ी पर लुम्बा राखी बाँधी जाती है। उत्तर प्रदेश और बिहार में बहनें प्रायः भाई के घर जाती हैं या भाई उनके घर पहुँचता है; घरों में पूड़ी, खीर और मिठाई बनती है। पुरोहित भी यजमानों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधते हैं। रीतियाँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति मानें।
आज के समय में
आज परिवार अलग-अलग शहरों और देशों में रहते हैं। भाई या बहन दूर हो तो राखी डाक से पहले ही भेज दें, क्योंकि विदेश में पहुँचने में एक सप्ताह या अधिक लग सकता है। दूसरे देश में समय अलग होता है, इसलिए वहाँ के स्थानीय शुभ समय और भद्रा का समय अलग से देखें। वीडियो कॉल पर शुभ समय में रस्म साथ-साथ निभाई जा सकती है। न मिल पाएँ तो भाई डाक से आई राखी स्वयं बाँध ले और कॉल पर बहन का आशीर्वाद ले। राखी, रोली और मिठाई बाज़ार या ऑनलाइन मिल जाती हैं। कामकाजी दिन हो तो अनुमत समय में संध्या को रस्म कर लें।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।