भाई दूज (भाऊ बीज)

Bhai Dooj (Bhau Beej)

भाई दूज भाई-बहन के स्नेह का पर्व है, जब बहनें तिलक लगाकर भाई की लंबी आयु माँगती हैं और यम तथा यमुना को याद किया जाता है।

देवता: यम, यमुनाअवधि: एक दिनऋतु: शरद ऋतुअन्य नाम: भाऊ बीज, भाई फोंटा, यम द्वितीया, भाई टीका, भ्रातृ द्वितीया

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तारीख़पर्व या अवसर
बुधवार, 11 नवंबर 2026भाई दूज
रविवार, 31 अक्टूबर 2027भाई दूज
गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028भाई दूज

परिचय

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है, यानी कार्तिक के शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन। शुक्ल पक्ष की तिथि होने से पूर्णिमान्त और अमान्त दोनों पंचांगों में इसका मास एक ही रहता है। यह गोवर्धन पूजा के अगले दिन आती है और दीपावली के पाँच दिन के उत्सव का समापन करती है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं और उसके कल्याण तथा लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा तथा स्नेह का वचन देते हैं।

यह पर्व रक्षा बंधन का साथी है: वह राखी के धागे का दिन है, तो भाई दूज तिलक और साथ बैठकर भोजन का।

महत्व और कथाएँ

सबसे प्रसिद्ध कथा यम और उनकी बहन यमुना की है। दोनों सूर्य देव की संतान हैं। यमुना कई बार भाई को घर बुला चुकी थीं, पर यम सदा व्यस्त रहते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे अंततः बहन के घर पहुँचे। यमुना ने तिलक, माला, दीप और प्रेम से बने भोजन से उनका स्वागत किया। यम इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने वरदान दिया: जो भाई इस दिन बहन से तिलक लगवाकर उसके घर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसी कारण इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

एक और कथा के अनुसार नरकासुर को हराने के बाद श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर गए, और उसने तिलक, मिठाई और फूलों से उनका स्वागत किया।

पूजा विधि

  1. बहन स्नान करके थाली सजाती है, जिसमें कुमकुम, चावल, दीप, फूल, मिठाई और नारियल या सूखा मेवा रखा जाता है।
  2. कई परिवारों में भाई को एक निश्चित दिशा की ओर मुँह करके बैठाया जाता है। रीति हो तो उसके सिर पर रूमाल या टोपी रखी जाती है।
  3. बहन भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती है, प्रायः चंदन या दही के साथ। फिर दीप से आरती उतारती है।
  4. कुछ परिवारों में बहन कलाई पर धागा बाँधती है, और अपने हाथ से मिठाई खिलाती है।
  5. वह भाई की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख की प्रार्थना करती है। बहन बड़ी हो तो भाई उसके चरण छूता है, छोटी हो तो उसे आशीर्वाद देता है।
  6. भाई स्नेह के प्रतीक के रूप में उपहार या कुछ धन देता है।
  7. दोनों साथ बैठकर भोजन करते हैं। बहुत से घरों में बहन भाई की पसंद के पकवान बनाती है।
  8. तिलक अपराह्न में लगाना श्रेष्ठ माना गया है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।

पूजन सामग्री

  • थाली
  • तिलक के लिए कुमकुम, अक्षत, चंदन या दही
  • दीप, धूप और कपूर
  • फूल, नारियल या मिठाई
  • मौली का धागा, यदि आपकी परंपरा में हो
  • मिठाई और एक छोटा उपहार

व्रत और भोजन

बहुत से परिवारों में बहन तिलक होने तक हल्का उपवास रखती है, पर यह सब जगह नहीं है। भाई प्रायः बहन के हाथ का बना भोजन करते हैं, जैसे पूड़ी, खीर, हलवा और उसकी पसंद की सब्ज़ी। बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग उपवास अपने चिकित्सक की अनुमति से ही रखें; हल्का उपवास रखें या न रखें, दोनों ठीक हैं।

क्या करें

  • जब संभव हो, तिलक के लिए दोपहर के बाद का समय चुनें।
  • भाई की पसंद का भोजन बनाएँ या मँगाएँ और साथ बैठकर खाएँ।
  • दूर के भाई-बहनों और रिश्तेदारों को फ़ोन या वीडियो से शामिल करें।
  • उपहार वह दें जो सोच-समझकर चुना गया हो, महँगा होना ज़रूरी नहीं।
  • जिनके भाई या बहन नहीं हैं, वे दोनों की सहमति से किसी चचेरे भाई-बहन या निकट मित्र को परिवार का सदस्य मानकर यह दिन मना सकते हैं।

क्या न करें

  • दिन को महँगे उपहारों की होड़ न बनाएँ।
  • भाई-बहनों की तुलना न करें और इस पर टिप्पणी न करें कि किसने कितना दिया।
  • आज के दिन मन में गाँठ न रखें। इसे किसी पुराने झगड़े को सुलझाने के अवसर की तरह लें।
  • दूरी के कारण दीप और तिलक न छोड़ें। वीडियो पर की गई रीति भी इस दिन का सम्मान है।
  • एक ही तरीक़े पर अड़ें नहीं। परंपराएँ अलग-अलग हैं।

क्षेत्रीय परंपराएँ

महाराष्ट्र और गोवा में यह भाऊ बीज है, जब बहनें भाइयों को विशेष भोजन कराती हैं। बंगाल में यह भाई फोंटा है, जिसमें बहन भाई के माथे पर चंदन का फोंटा लगाती है, एक छोटी तुकबंदी बोलती है और फिर भोज कराती है। नेपाल में तिहार का अंतिम दिन भाई टीका कहलाता है, जिसमें बहनें सतरंगी टीका लगाती हैं और गेंदे की माला पहनाती हैं। गुजरात में यह भाई बीज है। उत्तर भारत के कुछ भागों में तिलक की थाली में सूखा नारियल (गोला) रखा जाता है और प्रार्थना में यम तथा यमुना को याद किया जाता है।

मथुरा के विश्राम घाट पर इस दिन यमुना-स्नान की परंपरा है। बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के कुछ भागों में गोधन कूटने की लोक रीति निभाई जाती है: बहनें पहले प्रतीक रूप में भाई को शाप देती हैं, फिर प्रायश्चित के लिए रेंगनी का काँटा अपनी जीभ से लगाती हैं और भाई की लंबी आयु माँगती हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में कायस्थ परिवार इसी दिन चित्रगुप्त की पूजा करते हैं और क़लम-दवात का पूजन होता है।

आज के समय में

भाई-बहन अलग-अलग शहरों या देशों में हों तो वीडियो पर तिलक का स्मरण करना भी स्नेह की अभिव्यक्ति है। कई परिवार पहले से तिलक की थाली या मिठाई डाक से भेज देते हैं। तिलक परंपरा से अपराह्न में लगता है, इसलिए दफ़्तर के कारण समय कम हो तो दोपहर के भोजन के समय या शाम को संक्षिप्त रीति कर लेना भी उचित है।

बच्चे अपने हाथ से कार्ड बनाकर इस दिन को ख़ास बनाना पसंद करते हैं।

संबंधित पृष्ठ

परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।

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