दीपावली
Diwali (Deepavali)
पाँच दिन का दीपों का पर्व, जिसका मुख्य दिन कार्तिक अमावस्या की लक्ष्मी पूजा है, और जिसे दीप, रंगोली, मिठाई तथा परिवार के मिलन से मनाया जाता है।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | धनतेरस |
| रविवार, 8 नवंबर 2026 | नरक चतुर्दशी |
| रविवार, 8 नवंबर 2026 | दीपावली (लक्ष्मी पूजा) |
| मंगलवार, 10 नवंबर 2026 | गोवर्धन पूजा |
| बुधवार, 11 नवंबर 2026 | भाई दूज |
| बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 | धनतेरस |
| गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 | नरक चतुर्दशी |
| शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | दीपावली (लक्ष्मी पूजा) |
| शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 | गोवर्धन पूजा |
| रविवार, 31 अक्टूबर 2027 | भाई दूज |
| रविवार, 15 अक्टूबर 2028 | धनतेरस |
| मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028 | नरक चतुर्दशी |
| मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028 | दीपावली (लक्ष्मी पूजा) |
| बुधवार, 18 अक्टूबर 2028 | गोवर्धन पूजा |
| गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028 | भाई दूज |
परिचय
दीपावली ("दीपों की पंक्ति") सबसे प्रसिद्ध हिंदू पर्व है। जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदाय भी इसे मनाते हैं। मुख्य दिन अमावस्या है, जो कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है। उत्तर भारत के पूर्णिमान्त पंचांग में यह कार्तिक अमावस्या है, और गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण के अमान्त पंचांग में आश्विन मास को समाप्त करने वाली अमावस्या। रात वही है, केवल महीने का नाम बदलता है।
महत्व और कथाएँ
अलग-अलग समुदाय अलग कथाएँ याद करते हैं, पर सबका सार अंधकार पर प्रकाश की विजय है।
- राम की वापसी: उत्तर भारत में मान्यता है कि चौदह वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, और नगर दीपों से जगमगा उठा।
- कृष्ण और नरकासुर: दक्षिण भारत में, और कई क्षेत्रों में मुख्य पूजा से एक दिन पहले, श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय मनाई जाती है।
- लक्ष्मी: समुद्र मंथन से प्रकट देवी लक्ष्मी का इस रात स्वच्छ, प्रकाशित घर में स्वागत होता है।
- जैन: भगवान महावीर के निर्वाण का स्मरण, जो जैन परंपरा के अनुसार बिहार की पावापुरी में हुआ।
- सिख: बंदी छोड़ दिवस, जब गुरु हरगोबिंद साहिब अनेक बंदी राजाओं के साथ ग्वालियर के किले से मुक्त हुए।
- आर्य समाज: इसी दिन अजमेर में स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण हुआ, जिसे ऋषि निर्वाण दिवस के रूप में याद किया जाता है।
पाँच दिन
- धनतेरस (त्रयोदशी): धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा, धातु की खरीद और यम दीपदान।
- नरक चतुर्दशी (चतुर्दशी): भोर में अभ्यंग स्नान और संध्या को दीप; इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं।
- लक्ष्मी पूजा (अमावस्या): पर्व का मुख्य दिन।
- गोवर्धन पूजा और बेस्तु वरस (अगला दिन): उत्तर में अन्नकूट और गोवर्धन पूजा, और गुजरात में नया वर्ष।
- भाई दूज (द्वितीया): बहनें भाइयों के लिए मंगल कामना करती हैं।
कुछ वर्षों और क्षेत्रों में तिथियाँ आपस में मिल जाती हैं या एक दिन खिसक जाती हैं, इसलिए दिनों की संख्या अलग दिख सकती है।
पूजा विधि
- पर्व से पहले घर की सफाई करें। द्वार पर रंगोली बनाएँ और फूल या बंदनवार लगाएँ।
- मुख्य दिन स्नान करके नए या उत्सव के वस्त्र पहनें।
- मुहूर्त चुनें। लक्ष्मी पूजा अमावस्या की संध्या में प्रदोष काल में होती है, और स्थिर लग्न (जैसे वृषभ या सिंह) श्रेष्ठ माना जाता है। अपने शहर का समय पंचांग में देखें।
- स्वच्छ चौकी पर लक्ष्मी, गणेश और चाहें तो कुबेर तथा सरस्वती के चित्र या मूर्ति रखें, साथ में कलश और कुछ सिक्के।
- दीप जलाएँ; फूल, रोली, अक्षत, मिठाई और फल चढ़ाएँ। पूजा गणेश जी से शुरू करें।
- लक्ष्मी स्तोत्र, श्रीसूक्त या कोई सरल प्रार्थना पढ़ें। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।
- आरती करें, प्रसाद बाँटें, घर के चारों ओर दीप सजाएँ और परिवार के साथ भोजन करें।
- व्यापारी परिवार नए बही-खातों का चोपड़ा पूजन करते हैं।
पूजन सामग्री
- लक्ष्मी, गणेश और कुबेर के चित्र या मूर्ति, और जल से भरा कलश
- मिट्टी के दीप, घी या तेल, रुई की बाती, कपूर, धूप
- कमल और गेंदे के फूल, रोली, हल्दी, अक्षत, पान और सुपारी
- सिक्के, बही-खाते, मिठाई, खील, बताशे और फल
व्रत और भोजन
कोई अनिवार्य उपवास नहीं है, पर कुछ परिवार शाम की पूजा तक उपवास रखते हैं। भोजन सात्विक और उत्सवी होता है: लड्डू, बर्फी, गुजिया, खील-बताशे, पूरी-सब्ज़ी। उपवास रखना हो तो बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग उतना ही उपवास रखें जितना उनके चिकित्सक उचित समझें।
क्या करें
- घर साफ़ रखें और प्रवेश द्वार को रोशन रखें।
- दीप ऐसी थाली में रखें जो जले नहीं, परदे और कागज़ से दूर, और पास में पानी का पात्र रखें।
- मिठाई बाँटें, और अकेले रहने वाले किसी व्यक्ति को घर बुलाएँ।
- पटाखों की जगह दीप और रंगोली चुनें, ताकि बुज़ुर्ग, पशु और साँस के रोगी परेशान न हों।
- ज़रूरतमंदों को दान दें और बड़ों से आशीर्वाद लें।
क्या न करें
- जलते दीप, मोमबत्ती या अगरबत्ती को अकेला न छोड़ें, ख़ासकर घर से निकलते या सोते समय।
- फ्लैट, बालकनी या जहाँ प्रतिबंध हो, वहाँ पटाखे न चलाएँ; स्थानीय प्रशासन के नियम मानें।
- पालतू पशुओं को खुली लौ, तेज़ आवाज़ और चॉकलेट या किशमिश वाली मिठाई से दूर रखें।
- जुए या अधिक शराब को परंपरा का नाम न दें।
- उपहारों या सोने पर दिखावे के लिए खर्च न करें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
काशी, उत्तर प्रदेश और बिहार में मिट्टी के दीप, खील-बताशे और मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश की पूजा आम है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई घरों में दीपावली के दिन भोर में सूप पीटकर दरिद्रता को बाहर निकालने की रीति है, जिसे दलिद्दर खेदना कहते हैं। बिहार और पूर्वांचल में लड़कियाँ मिट्टी या लकड़ी का छोटा घर, घरौंदा, बनाती हैं। मिथिला में हुक्का-पाती की रीति है, जिसमें सन की जलती डंडियाँ घर में घुमाई जाती हैं। काशी में इसके पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को घाटों पर देव दीपावली मनती है।
गुजरात में बेस्तु वरस नया वर्ष है, महाराष्ट्र में पहली सुबह अभ्यंग स्नान और फराल से शुरू होती है, बंगाल में अमावस्या की रात काली पूजा होती है, और नेपाल में यह तिहार है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
आज के समय में
कार्यदिवस पर पड़ने वाली दीपावली में काम हल्का रखें: सप्ताहांत में सफाई कर लें, एक रात पहले चौकी सजा लें, संध्या को दीप जलाएँ और पूजा संक्षिप्त पर सच्चे मन से करें। फ्लैटों में खुली लौ के नियम देख लें; बिजली के दीप और फूलों की रंगोली भी सुंदर विकल्प हैं। विदेश में रहने वाले परिवार अपने शहर का प्रदोष समय देखकर शाम को पूजा करें और घर वालों से फ़ोन पर बात करें; कुछ दीप, साझा भोजन और परिवार का साथ ही पूरा उत्सव है।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।