धनतेरस
Dhanteras (Dhanatrayodashi)
दीपावली का पहला दिन, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी, जब धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है और यमराज के लिए दीप जलाया जाता है।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | धनतेरस |
| बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 | धनतेरस |
| रविवार, 15 अक्टूबर 2028 | धनतेरस |
परिचय
धनतेरस दीपावली के पाँच दिनों का पहला दिन है। उत्तर भारत के पूर्णिमान्त पंचांग में यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के अमान्त पंचांग में इसी दिन को आश्विन कृष्ण त्रयोदशी कहते हैं। दिन वही है, केवल महीने का नाम बदलता है।
"धन" का अर्थ है संपत्ति और "तेरस" का अर्थ है तेरहवीं तिथि। इसे धनत्रयोदशी भी कहते हैं, और आयुर्वेद से जुड़े लोग इसे धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाते हैं। पूजा संध्या के प्रदोष काल में होती है। यदि त्रयोदशी दो दिनों के सायंकाल को छूती हो, तो आमतौर पर वह दिन लिया जाता है जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलती हो।
महत्व और कथाएँ
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है, और बहुत से वैद्य इस दिन उनकी पूजा करके स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। कहावत है, पहला सुख निरोगी काया। यह दिन लक्ष्मी और धन के रक्षक कुबेर से भी जुड़ा है।
एक प्रसिद्ध कथा में एक राजकुमार की कुंडली में विवाह के चौथे दिन साँप के काटने से मृत्यु लिखी थी। उसकी पत्नी ने द्वार पर सोने-चाँदी के सिक्के और अनेक दीप सजाए और रात भर कथा-गीत सुनाए। यमराज की आँखें उस प्रकाश से चौंधिया गईं और वे राजकुमार को लिए बिना लौट गए। यम दीपदान की रीति इसी कथा से जोड़ी जाती है।
पूजा विधि
- घर की सफाई करें और द्वार पर रंगोली और फूलों से सजावट करें।
- शाम को प्रदोष मुहूर्त में स्वच्छ आसन पर धन्वंतरि, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर के चित्र या मूर्ति रखें।
- दीप जलाएँ; फूल, धूप, अक्षत, मिठाई और फल अर्पित करें।
- नई खरीदी हुई धातु की वस्तु, या घर के सिक्के, आभूषण और बर्तन को रोली और फूल से पूजें।
- लक्ष्मी या कुबेर स्तोत्र का पाठ करें, या "ॐ धन्वंतरये नमः" का जप करें। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।
- आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- सूर्यास्त के बाद यम दीपदान करें: मिट्टी के चौमुखे दीपक में सरसों का तेल भरकर घर के बाहर या द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें, और परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें। इस अवसर पर बोला जाने वाला श्लोक अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में थोड़े भिन्न पाठ में मिलता है, इसलिए उसे अपने पुरोहित से पूछकर ही पढ़ें।
पूजन सामग्री
- धन्वंतरि, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर के चित्र या मूर्ति
- चाँदी या सोने के सिक्के, नया बर्तन या कोई धातु की वस्तु
- फूल, रोली, हल्दी, अक्षत, धूप, कपूर
- मिट्टी के दीप, सरसों का तेल या घी, रुई की बाती
- मिठाई, फल, बताशे; कई क्षेत्रों में धनिया के बीज और गुड़
व्रत और भोजन
इस दिन कोई कठोर उपवास नहीं होता। पूजा के बाद हल्का शाकाहारी भोजन और मिठाई खाई जाती है। महाराष्ट्र में कुटे हुए धनिया और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाया जाता है, और दक्षिण के कुछ भागों में इन्हीं दिनों औषधीय लेह्यम बनाकर खाया जाता है।
क्या करें
- कोई छोटी धातु की वस्तु खरीदें, जैसे बर्तन, चम्मच या सिक्का। छोटी वस्तु भी मान्य है।
- पुराने चाँदी, पीतल और ताँबे के बर्तन माँजकर चमकाएँ।
- अँधेरा होने पर प्रवेश द्वार पर दीप सजाएँ।
- यम दीपदान स्थिर पात्र में, सुरक्षित रूप से करें।
- धन के साथ स्वास्थ्य और कृतज्ञता के बारे में भी सोचें।
- अपने शहर के प्रदोष मुहूर्त में पूजा करें, और कुछ दान दें।
क्या न करें
- सामर्थ्य से अधिक खर्च या भारी उधार न करें; परंपरा छोटी और सच्चे मन से की गई खरीद को महत्व देती है।
- कुछ परिवार इस दिन लोहे, काँच या नुकीली वस्तुएँ नहीं खरीदते; यह पारिवारिक मान्यता है, सार्वभौमिक नियम नहीं।
- कुछ परिवार इस दिन उधार नहीं देते; यह लोक-मान्यता है।
- जलते दीप परदे, कागज़ या सूखे पत्तों के पास न छोड़ें।
- इस दिन की खरीद से धन-लाभ की गारंटी न मानें; यह श्रद्धा और परंपरा की बात है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
काशी में अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से अन्नकूट तक माता अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होते हैं, और भक्तों को खजाने का प्रसाद दिया जाता है। उत्तर भारत में बर्तन और चाँदी की खरीद का चलन बहुत है। गुजरात और राजस्थान के व्यापारी परिवार इन दिनों नई बही खरीदते हैं, जिसका चोपड़ा पूजन दीपावली पर होता है। महाराष्ट्र में एक दिन पहले वसुबारस पर गाय और बछड़े की पूजा होती है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
आज के समय में
धनतेरस अक्सर कार्यदिवस पर पड़ता है, इसलिए दफ़्तर से लौटकर प्रदोष काल में की गई छोटी पूजा काफी है। चाँदी का सिक्का या रसोई का कोई नया बर्तन किसी भी दुकान से लिया जा सकता है; उतना ही खरीदें जितना आपका बजट अनुमति दे। यम दीपदान ऐसे स्थिर पात्र में रखें जो रेलिंग और पायदान से दूर हो। जिन फ्लैटों में खुली लौ की मनाही है, वहाँ बिजली का दीप या काँच के सुरक्षित पात्र में दीप रखें। विदेश में रहने वाले परिवार अपने शहर की त्रयोदशी तिथि और प्रदोष का समय पंचांग में देख लें।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।