पूर्णिमा व्रत
Purnima Vrat
पूर्णिमा व्रत हर महीने की पूर्णिमा का उपवास है, जिसमें सत्यनारायण की पूजा-कथा, पवित्र स्नान, दान और चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा |
| गुरुवार, 24 दिसंबर 2026 | मार्गशीर्ष पूर्णिमा |
| शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 | पौष पूर्णिमा |
| शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 | माघ पूर्णिमा |
| सोमवार, 22 मार्च 2027 | फाल्गुन पूर्णिमा |
| मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 | चैत्र पूर्णिमा |
| गुरुवार, 20 मई 2027 | वैशाख पूर्णिमा |
| शुक्रवार, 18 जून 2027 | ज्येष्ठ पूर्णिमा |
| रविवार, 18 जुलाई 2027 | आषाढ़ पूर्णिमा |
| मंगलवार, 17 अगस्त 2027 | श्रावण पूर्णिमा |
| बुधवार, 15 सितंबर 2027 | भाद्रपद पूर्णिमा |
| शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2027 | आश्विन पूर्णिमा |
परिचय
पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि है, पूरे चन्द्रमा की रात। बहुत-से परिवार हर महीने इस दिन व्रत रखते हैं, यानी उपवास के साथ प्रार्थना करते हैं। यह सबसे अधिक निभाए जाने वाले मासिक व्रतों में है और इसमें चन्द्रमा की विशेष भूमिका रहती है।
पूर्णिमा पर घरों में सबसे आम पूजा सत्यनारायण की पूजा और कथा है, जो विष्णु के सत्य-स्वरूप को समर्पित है।
महत्व और कथाएँ
पूर्णिमा को पूर्णता और कृतज्ञता का दिन माना जाता है। सत्यनारायण कथा में उन लोगों का वर्णन है जिन्होंने सत्यनारायण की पूजा की मनौती मानी, उसे भूल गए, कष्ट पाए और मनौती पूरी करने पर फिर शांति पाई। संदेश सरल है: वचन निभाएँ और आभारी रहें। पुराणों में पूर्णिमा पर स्नान और दान की प्रशंसा है, विशेषकर कार्तिक, माघ और वैशाख जैसे महीनों में।
स्नान और दान
पूर्णिमा पर गंगा जैसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान की परंपरा है; काशी, प्रयागराज और हरिद्वार के घाटों पर इस दिन स्नान करने वालों की संख्या बढ़ जाती है। जहाँ यह संभव न हो, वहाँ घर के स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूँदें डालना या पवित्र नदियों का स्मरण करके नहाना मान्य है। अन्न, वस्त्र या धन का दान भी इस दिन का हिस्सा है।
विशेष पूर्णिमाएँ
हर पूर्णिमा का अपना नाम और स्वरूप है। नाम क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं, इसलिए इसे सामान्य मार्गदर्शन समझें। पूर्णिमा का महीना पूर्णिमान्त और अमान्त दोनों पद्धतियों में एक ही रहता है।
| मास | प्रचलित नाम या पर्व |
|---|---|
| चैत्र | चैत्र पूर्णिमा (कई क्षेत्रों में हनुमान जयंती) |
| वैशाख | वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) |
| ज्येष्ठ | ज्येष्ठ पूर्णिमा (कुछ क्षेत्रों में वट पूर्णिमा) |
| आषाढ़ | गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) |
| श्रावण | श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) |
| भाद्रपद | भाद्रपद पूर्णिमा (पितृ पक्ष शुरू होने से एक दिन पहले) |
| आश्विन | शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) |
| कार्तिक | कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) |
| मार्गशीर्ष | मार्गशीर्ष पूर्णिमा (दत्तात्रेय जयंती) |
| पौष | पौष पूर्णिमा |
| माघ | माघ पूर्णिमा (स्नान का बड़ा पर्व) |
| फाल्गुन | फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन और होली) |
पूजा विधि
- प्रातः उठकर स्नान करें और पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।
- स्वच्छ आसन पर सत्यनारायण या विष्णु का चित्र रखें और दीप जलाएँ।
- फूल, तुलसी दल, फल और विशेष प्रसाद (नीचे देखें) के साथ पूजा करें।
- सत्यनारायण कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
- दिन जप और शांत जीवन में बिताएँ।
- संध्या को चन्द्रमा उगने पर उसे जल या दूध का अर्घ्य दें और धन्यवाद की छोटी प्रार्थना करें।
- परिवार और मित्रों के साथ प्रसाद बाँटकर हल्का भोजन करें।
पूजन सामग्री
- सत्यनारायण या विष्णु का चित्र अथवा मूर्ति
- तुलसी दल, फूल, धूप, दीप
- सवाया (सपाद) प्रसाद: सूजी या आटे का हलवा अथवा पंजीरी, घी, चीनी और केला (सवा मात्रा, यानी एक और एक चौथाई भाग)
- फल, पान-सुपारी, नारियल
- पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी)
- कलश में जल और आम के पत्ते
व्रत और भोजन
बहुत-से लोग दिन भर फल और दूध पर रहते हैं और संध्या की पूजा के बाद भोजन करते हैं। कुछ लोग एक बार अनाज-रहित भोजन लेते हैं। जितना सहजता से निभ सके, उतना चुनें। बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार, दवा लेने वाले और गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाएँ उपवास उतना ही रखें जितना डॉक्टर की सलाह से ठीक हो; हल्का व्रत भी मान्य है।
क्या करें
- सत्यनारायण की पूजा की मनौती मानी हो तो उसे निभाएँ।
- जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- परिवार के साथ कथा पढ़ें या सुनें।
- संध्या को चन्द्रमा के दर्शन कर छोटी प्रार्थना करें।
- ज़रूरतमंद को भोजन या धन दें।
- प्रसाद सबके साथ बाँटें।
क्या न करें
- पूर्ण व्रत रखें तो अनाज न खाएँ।
- आरती और प्रसाद बाँटना न छोड़ें।
- बहस और कठोर वचन से बचें।
- प्रसाद के भोजन को व्यर्थ न जाने दें।
- अस्वस्थ हों तो कठोर उपवास न रखें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
उत्तर प्रदेश और बिहार के अनेक घरों में पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा होती है और गंगा-स्नान की परंपरा है। गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल में भी मासिक पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा होती है; दक्षिण में कई लोग इसे लक्ष्मी या चन्द्र पूजा के रूप में रखते हैं। ओडिशा में आश्विन मास में कुमार पूर्णिमा मनाई जाती है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
आज के समय में
पूर्णिमा का चन्द्रमा शाम को उगता है, इसलिए कामकाज के बाद पूजा करके चन्द्रमा को अर्घ्य देना संभव है। अपने नगर में पूर्णिमा तिथि का समय पंचांग में देख लें, क्योंकि तिथि कभी-कभी असुविधाजनक समय पर शुरू या समाप्त होती है। हलवे का प्रसाद घर पर आसानी से बन जाता है। फ़्लैट में छत या बालकनी से चन्द्रमा को अर्घ्य दें और जल किसी गमले में डाल दें। बहुत-से मंदिर और समाज पास के सप्ताहांत पर सामूहिक सत्यनारायण पूजा रखते हैं, जिससे विदेश में रहने वाले परिवार भी जुड़ सकते हैं।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।