शरद पूर्णिमा
Sharad Purnima
आश्विन की पूर्णिमा, जब चाँदनी में खीर रखी जाती है, रात में लक्ष्मी की पूजा होती है और कृष्ण की रास लीला याद की जाती है।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| रविवार, 25 अक्टूबर 2026 | शरद पूर्णिमा (कोजागरी, निशीथ काल) |
| सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 | आश्विन पूर्णिमा |
| गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 | शरद पूर्णिमा (कोजागरी, निशीथ काल) |
| शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2027 | आश्विन पूर्णिमा |
| सोमवार, 2 अक्टूबर 2028 | शरद पूर्णिमा (कोजागरी, निशीथ काल) |
| मंगलवार, 3 अक्टूबर 2028 | आश्विन पूर्णिमा |
परिचय
शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा है। यह दशहरे के बाद आती है, शरद ऋतु के बीच, जब आकाश साफ़ होता है और चन्द्रमा सबसे उजला माना जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल में इसके अलग नाम हैं, और ओडिशा में इसे कुमार पूर्णिमा कहते हैं।
आश्विन की पूर्णिमा पूर्णिमान्त और अमान्त, दोनों पंचांगों में एक ही है। पर्व रात का है, इसलिए पूर्णिमा तिथि और चन्द्रोदय का समय अपने शहर के लिए इस पंचांग में देख लें।
महत्व और कथाएँ
मान्यता है कि इस रात चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें शीतल तथा पोषक होती हैं। इसीलिए परिवार दूध से बनी मिठाई, विशेषकर खीर, चाँदनी में रखते हैं। इस रात के तीन प्रमुख भाव हैं।
कोजागरी लक्ष्मी: अनेक क्षेत्रों में माना जाता है कि इस रात लक्ष्मी जी पृथ्वी पर घूमकर पूछती हैं, "को जागर्ति?" यानी कौन जाग रहा है। जो भजन, पूजा या शांत खेल के साथ जागते हैं, उन पर उनकी कृपा मानी जाती है। कोजागरी शब्द यहीं से आया है। इस पूजा का मुख्य समय निशीथ काल, यानी मध्यरात्रि का समय माना जाता है।
रास लीला: वैष्णव परंपरा में इस रात वृन्दावन में श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया। मंदिरों में विशेष दर्शन और भजन संध्या होती है।
कुमार पूर्णिमा: ओडिशा में कुँवारी कन्याएँ चन्द्रमा और सूर्य की पूजा करती हैं, और बच्चे पारंपरिक खेल खेलते हैं। आश्विन पूर्णिमा को महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है।
पूजा विधि
- सुबह स्नान करें और घर साफ़ करें। कुछ परिवार दिन में हल्का उपवास रखते हैं।
- शाम को लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र को फूल, दीप और धूप से पूजें। परिवार की रीति हो तो विष्णु या श्रीकृष्ण को भी शामिल करें।
- दूध, चावल, चीनी और इलायची से खीर बनाएँ और उसे साफ़ पतले कपड़े या जाली से ढक दें।
- चन्द्रमा ऊपर चढ़ आए तो उसे जल या दूध का अर्घ्य दें और दीप दिखाएँ।
- खीर को कुछ घंटे उस जगह रखें जहाँ चाँदनी पड़ती हो।
- हो सके तो रात का कुछ भाग जागकर भजन, कथा-पाठ या शांत खेल में बिताएँ।
- प्रसाद के रूप में थोड़ी खीर खाएँ और परिवार में बाँटें।
पूजन सामग्री
- लक्ष्मी, विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र।
- फूल, धूप, घी के दीप, रोली और अक्षत।
- खीर के लिए दूध, चावल, चीनी, इलायची और मेवे।
- साफ़ कटोरा और ढकने के लिए पतला कपड़ा।
- चन्द्रमा को अर्घ्य के लिए छोटे लोटे में जल।
व्रत और भोजन
कुछ परिवार चन्द्रोदय तक उपवास रखकर खीर से पारण करते हैं। बहुत-से लोग उपवास नहीं रखते। खीर इस रात का परंपरागत भोग है। गुजरात और महाराष्ट्र में मसाले वाला दूध, पोहा और चिवड़ा भी खाया जाता है, और बंगाल में नारू तथा मोआ बनते हैं। उपवास रखें तो बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग इसे केवल अपने चिकित्सक की अनुमति से रखें। मधुमेह वाले लोग मीठी खीर थोड़ी मात्रा में ही लें।
क्या करें
- चाँदनी में खीर रखने के लिए बालकनी, आँगन या छत जैसी खुली जगह चुनें।
- कीड़ों से बचाने के लिए खीर को पतले कपड़े से ढकें।
- अपने शहर का चन्द्रोदय और पूर्णिमा का समय देख लें।
- संभव हो तो शाम के भजन या कथा में शामिल हों।
- खीर पड़ोसियों और बड़ों के साथ बाँटें।
- ताज़े दूध का उपयोग करें और खीर स्वच्छ रखें।
- कुछ देर चुपचाप चन्द्रमा को कृतज्ञता से निहारें।
क्या न करें
- गर्म मौसम में दूध की मिठाई कई घंटे खुले में न छोड़ें। देर तक बाहर रही हो तो उसे न खाएँ।
- बर्तन को अस्थिर मुँडेर या रेलिंग पर न रखें।
- खीर के बारे में सेहत के दावे न करें; यह धार्मिक भोग और भोजन है।
- खीर को खुले में छोड़कर सो न जाएँ; तय समय पर उसे भीतर ले आएँ।
- जागरण के लिए अपनी सेहत या अगले दिन के काम की अनदेखी न करें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
मिथिला में यह कोजागरा है। नवविवाहित वर के घर वधू के घर से मखाना, पान और बताशा आता है, जो पड़ोस और रिश्तेदारों में बाँटा जाता है। बंगाल में भी कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है। मथुरा और वृन्दावन में यह रास पूर्णिमा है। काशी के रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला लगभग एक माह चलकर शरद पूर्णिमा को श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ पूर्ण होती है। गुजरात में इस रात गरबा होता है, महाराष्ट्र में कोजागिरी पर दूध चन्द्रमा को अर्पित किया जाता है, और ओडिशा में कुमार पूर्णिमा मनती है। कुछ परिवार खीर चाँदी के कटोरे में रखते हैं, कुछ किसी भी साफ़ बर्तन में। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
आज के समय में
चन्द्रमा शाम को दिखता है, पर बादल, पेड़ और ऊँची इमारतें उसे ढक सकती हैं। फ़्लैट में खिड़की की चौखट, बालकनी या छत की मेज़ काफ़ी है। ठंडी जगहों पर बर्तन कम समय के लिए बाहर रखकर भीतर ले आएँ, या चाँदनी वाली खिड़की के पास रखें। बची हुई खीर तुरंत फ़्रिज में रख दें। कामकाजी रात में छोटी पूजा, खीर और कुछ मिनट की चाँदनी भी पूरा पर्व है। विदेश में रहने वाले परिवार मंदिर की लक्ष्मी पूजा या गुजराती समाज के गरबा में शामिल हो सकते हैं।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।