खरमास (मलमास)

Kharmas (Malmas)

सूर्य जब गुरु की राशियों धनु और मीन में रहते हैं, तब खरमास कहलाता है; इस अवधि में अनेक परिवार विवाह जैसे नए शुभ कार्य टाल देते हैं।

देवता: सूर्य देवअवधि: लगभग एक सौर मास, वर्ष में दो बारऋतु: शीत ऋतु (धनु) और वसंत ऋतु (मीन)अन्य नाम: मलमास, धनुर्मास, मीन संक्रांति काल

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परिचय

खरमास उन दो कालखंडों को कहते हैं जब सूर्य धनु राशि और मीन राशि में रहते हैं। परंपरागत ज्योतिष में ये दोनों राशियाँ गुरु (बृहस्पति) की मानी जाती हैं। यहाँ राशियाँ निरयन गणना की हैं, यानी अयनांश के संशोधन के साथ।

  • धनु वाला खरमास धनु संक्रांति (सूर्य के धनु राशि में प्रवेश) से शुरू होता है और मकर संक्रांति पर समाप्त होता है।
  • मीन वाला खरमास मीन संक्रांति से शुरू होता है और मेष संक्रांति पर समाप्त होता है।

यह सूर्य की गति पर चलता है, इसलिए सौर कैलेंडर में हर वर्ष लगभग उसी समय आता है, जबकि चन्द्र तिथियाँ बदलती रहती हैं। कई जगह इसे मलमास भी कहते हैं, पर अधिक मास को भी मलमास कहा जाता है। दोनों अलग हैं: अधिक मास चन्द्र वर्ष में जुड़ने वाला अतिरिक्त महीना है, खरमास सूर्य की राशि पर टिका है।

महत्व और कथाएँ

शुभ कार्य क्यों टाले जाते हैं, इसके कई कारण बताए जाते हैं। एक मान्यता है कि जब सूर्य गुरु की राशि में होते हैं, तब उनका तेज मंद और शुभ कार्यों के लिए आवश्यक गुरु का बल कमज़ोर माना जाता है।

"खर" शब्द को एक लोककथा से जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार सूर्य के रथ के घोड़े थक गए तो कुछ समय के लिए रथ में खर, यानी गधे, जोत दिए गए और रथ की चाल धीमी पड़ गई। दूसरे पाठ में "मल" का अर्थ अशुद्धि लिया जाता है, यानी नई शुरुआत के लिए अनुकूल न माना जाने वाला समय।

इसीलिए बहुत से परिवार इन महीनों में विवाह, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, नामकरण, मुण्डन और नया कारोबार शुरू करना टाल देते हैं। नित्य पूजा, व्रत, त्योहार और पितरों के कर्म पहले की तरह चलते हैं। यह परंपरा की बात है, डर की नहीं, और जो इस समय कोई कार्य कर लेता है उसके लिए किसी अनिष्ट की बात नहीं कही गई है। अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।

पूजा विधि

यह भक्ति और शांत साधना का समय है। इन दिनों ये नियम अपनाए जाते हैं।

  1. ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर प्रातःकाल की प्रार्थना करें।
  2. स्नान के बाद पूर्व दिशा में मुख करके ताँबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य दें।
  3. आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य के मंत्रों का पाठ करें। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।
  4. गीता, रामायण या भागवत का रोज़ थोड़ा पाठ करें।
  5. अन्न, ऊनी वस्त्र या अनाज का दान करें।
  6. मंदिर जाएँ। धनु मास में दक्षिण भारत की तरह सुबह की विशेष आराधना में भी शामिल हों।

पूजन सामग्री

  • ताँबे का लोटा और स्वच्छ जल
  • लाल फूल, लाल चन्दन या रोली
  • दीपक, धूप और घी
  • दान के लिए ऊनी वस्त्र, कंबल और अन्न

व्रत और भोजन

खरमास में कोई अनिवार्य उपवास नहीं है। लोग रविवार को सूर्य के नाम पर व्रत रखते हैं या एकादशी जैसे अपने नियमित व्रत करते हैं। भोजन सादा और सात्विक रखना अच्छा माना जाता है। दक्षिण भारत के मंदिरों में इन दिनों सुबह पोंगल जैसा सादा प्रसाद बँटता है। उपवास रखना हो तो बच्चों, बुज़ुर्गों, बीमारों, गर्भवती स्त्रियों और दवा लेने वालों को उतना ही रखना चाहिए जितना उनके चिकित्सक उचित समझें।

क्या करें

  • सूर्योदय के समय की अपनी नित्य प्रार्थना बनाए रखें।
  • पूर्व की ओर मुख करके सूर्य को जल चढ़ाएँ।
  • रोज़ थोड़ा पाठ करें या कोई मंत्र जपें।
  • ज़रूरतमंदों को ऊनी वस्त्र या भोजन दें।
  • परिवार में खरमास माना जाता हो तो विवाह और गृह प्रवेश इस काल के बाद रखें।
  • शंका हो तो बड़ों या पुरोहित से पूछ लें।

क्या न करें

  • नियमित पूजा, व्रत और त्योहार बंद न करें।
  • इस काल को दुर्भाग्य का समय न मानें।
  • पितरों के कर्म इसके कारण न टालें।
  • ज़रूरी इलाज, क़ानूनी या कामकाज के काम इसके कारण न रोकें।
  • जो परिवार अलग रीति मानते हैं, उनकी आलोचना न करें।

क्षेत्रीय परंपराएँ

अलग-अलग क्षेत्रों की राय अलग है।

  • उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब): दोनों खरमास में विवाह जैसे आयोजन कड़ाई से टाले जाते हैं। काशी और पूर्वांचल में धनु वाला खरमास मकर संक्रांति की खिचड़ी के साथ समाप्त होता है, और शुभ कार्यों का मौसम फिर शुरू हो जाता है।
  • दक्षिण भारत: धनु मास को धनुर्मास और तमिलनाडु में मार्गज़ी कहते हैं। इसे अशुभ नहीं, पवित्र समय माना जाता है। तमिलनाडु में स्त्रियाँ तिरुप्पावै गाती हैं, और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में सुबह की विशेष पूजा होती है। विवाह प्रायः नहीं होते, पर मंदिरों में उत्सव खूब होते हैं।
  • बंगाल और ओडिशा: सूर्य की राशि-यात्रा सौर पंचांग से देखी जाती है और रीतियाँ उत्तर भारत से अलग हैं।
  • महाराष्ट्र और गुजरात: बहुत से परिवार विवाह नहीं करते, पर कड़ाई समुदाय के अनुसार बदलती है।
  • केरल: धनु मास मंदिरों के उत्सवों का समय है, और विवाह की रीति समुदाय के अनुसार अलग है।

परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।

आज के समय में

विवाह भवनों और पुरोहितों की बुकिंग अक्सर महीनों पहले हो जाती है, इसलिए परिवार में खरमास माना जाता हो तो तारीख़ तय करने से पहले इसकी अवधि देख लें। धनु वाले खरमास की ठंडी सुबह दीपक, सूर्य को जल और सादे नाश्ते के साथ दिन शुरू करने का अच्छा अवसर है। फ्लैट में रहने वाले लोग बालकनी या छत से सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं। विदेश में रहने वाले परिवार संक्रांति का सही क्षण अपने शहर के अनुसार देखें, क्योंकि समय-क्षेत्र के कारण यह एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।

संबंधित पृष्ठ

परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।

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