हरतालिका तीज
Hartalika Teej
माँ पार्वती की शिव के प्रति निष्ठा की स्मृति में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को स्त्रियों द्वारा रखा जाने वाला व्रत, जो परिवार के सुख और सौहार्द की कामना से जुड़ा है।
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| तारीख़ | पर्व या अवसर |
|---|---|
| सोमवार, 14 सितंबर 2026 | हरतालिका तीज |
| शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 | हरतालिका तीज |
| मंगलवार, 22 अगस्त 2028 | हरतालिका तीज |
परिचय
हरतालिका तीज एक व्रत है, जो विवाहित और अविवाहित स्त्रियाँ माँ पार्वती और भगवान शिव के सम्मान में रखती हैं। यह भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आता है, यानी भाद्रपद के उजले पक्ष की तीसरी तिथि को। कई पंचांग चतुर्थी से जुड़ी तृतीया को श्रेष्ठ मानते हैं, इसलिए यह प्रायः गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले पड़ता है। शुक्ल पक्ष की तिथि होने से पूर्णिमान्त और अमान्त दोनों पंचांगों में यह एक ही रहती है।
तीज के तीन प्रमुख पर्व माने जाते हैं: हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया), कजरी तीज (भाद्रपद कृष्ण तृतीया, पूर्णिमान्त गणना; अमान्त में श्रावण कृष्ण तृतीया) और हरतालिका तीज। कजरी तीज उत्तर प्रदेश और बिहार में, ख़ासकर मिर्ज़ापुर और काशी की कजरी गायन परंपरा के लिए जानी जाती है।
विवाहित स्त्रियाँ पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं, अविवाहित स्त्रियाँ अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं, और कई लोग इसे परिवार के सौहार्द के लिए रखते हैं। कुछ ग्रंथों में हस्त नक्षत्र को श्रेष्ठ बताया गया है, फिर भी पूजा का समय अपने पंचांग से देखें। पूजा प्रातःकाल और प्रदोष काल, दोनों में की जाती है।
महत्व और कथाएँ
"हरतालिका" नाम "हरत" यानी हरण और "आलिका" यानी सखी से बना है। कथा के अनुसार पार्वती जी शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं, पर उनके पिता हिमवान ने उनका विवाह विष्णु जी से तय कर दिया था। उनकी सखी उन्हें वन में ले गई। वहाँ पार्वती जी ने रेत का शिवलिंग बनाकर कठोर तप किया। शिव जी प्रसन्न हुए और उन्हें स्वीकार किया। पूजा के समय यही कथा कही और सुनी जाती है।
स्त्रियाँ पार्वती जी के संकल्प और निष्ठा का आदर करती हैं। इस पर्व का उल्लास भरा रूप भी है: गीत, झूले, मेहंदी और हरे वस्त्र। यह व्रत किसी पर कठोर भूमिकाएँ थोपने के लिए नहीं है। आज बहुत से परिवार इसे श्रद्धा, सखियों के साथ आनंद और वर्षा ऋतु की ख़ुशी का पर्व मानते हैं।
पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें, प्रायः हरे या लाल। बहुत सी स्त्रियाँ एक दिन पहले हाथों में मेहंदी लगाती हैं।
- व्रत का संकल्प लें।
- प्रातःकाल या प्रदोष काल में साफ़ आसन पर मिट्टी या बालू से शिव, पार्वती और गणेश जी की छोटी आकृतियाँ बनाएँ। कुछ परिवार छपे चित्र का उपयोग करते हैं।
- आकृतियों को प्रतीक रूप में जल से स्नान कराएँ और फूल, बेलपत्र, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
- माँ पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें: रोली, चूड़ियाँ, सिंदूर, छोटा शीशा और बिंदी।
- दीप और धूप जलाएँ, फिर हरतालिका तीज की कथा पढ़ें या सुनें।
- आरती करें और फल व मिठाई का भोग लगाएँ। कई परंपराओं में भजन गाते हुए रात भर जागरण किया जाता है।
- अगली सुबह आकृतियों को किसी जलाशय में या पौधे की जड़ में विसर्जित करें और पारण करके व्रत खोलें।
पूजन सामग्री
- मिट्टी या बालू की शिव, पार्वती और गणेश की आकृतियाँ, या उनके चित्र
- बेलपत्र, धतूरे के फूल और अन्य फूल
- रोली, हल्दी, चंदन और अक्षत
- सुहाग की सामग्री: चूड़ियाँ, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, आलता और चुनरी
- फल, मिठाई, नारियल, धूप, दीप और जल का कलश
व्रत और भोजन
बहुत सी स्त्रियाँ सुबह से अगली सुबह के सूर्योदय तक निर्जला उपवास रखती हैं, यानी जल भी नहीं पीतीं। कुछ केवल फल और जल लेती हैं। हल्का उपवास भी पूरी तरह स्वीकार्य है। बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग उपवास तभी रखें जब चिकित्सक अनुमति दें। अगली सुबह पूजा के बाद सादा शाकाहारी भोजन करके व्रत खोला जाता है।
क्या करें
- व्रत से एक दिन पहले अच्छी तरह आराम करें, और चाहें तो मेहंदी लगाएँ।
- शांत और सच्चे मन से प्रार्थना करें।
- परिवार और सखियों के साथ बैठकर कथा सुनें।
- स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हो तो जल ग्रहण करें।
- किसी सुहागिन स्त्री को सुहाग की सामग्री भेंट करें।
- व्रत खोलते समय हल्का भोजन लें।
क्या न करें
- किसी पर कठोर उपवास का दबाव न डालें।
- यदि आपने जागरण का निश्चय किया है, तो पूजा के दौरान सो न जाएँ, जब तक स्वास्थ्य के कारण आवश्यक न हो।
- यदि आपकी परंपरा मना करती हो, तो व्रत खुलने से पहले अन्न और नमक न लें।
- दिन भर क्रोध और कठोर बोली से बचें।
- पूजा की सामग्री गंदे या संरक्षित जलाशयों में न डालें, और प्लास्टिक की सजावट से बचें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह व्रत कड़े नियमों से रखा जाता है और रात का जागरण आम है। छत्तीसगढ़ में इसे तीजा कहते हैं और विवाहित बेटियाँ प्रायः मायके आकर व्रत रखती हैं। राजस्थान में झूले और शोभायात्राएँ हरियाली तीज से अधिक जुड़े हैं। महाराष्ट्र में हरतालिका पर बालू के शिवलिंग का पूजन होता है। कर्नाटक में इसे गौरी हब्बा और आंध्र प्रदेश में गौरी व्रतम कहा जाता है। नेपाल में तीज स्त्रियों का बड़ा पर्व है, जिसमें लाल वस्त्र, गीत, नृत्य और व्रत होता है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
आज के समय में
कार्य-दिवस पर पड़ने पर कई परिवार मुख्य पूजा शाम को करते हैं और दिन में आंशिक उपवास रखते हैं। नौकरी करने वाली स्त्रियाँ अपने स्वास्थ्य के अनुसार फल और जल के साथ हल्का व्रत रख सकती हैं। फ़्लैट में मिट्टी या बालू की छोटी आकृतियाँ बनाकर पूजा के बाद गमले की मिट्टी में विसर्जित कर दें। दीप और कपूर जलाते समय धुआँ-अलार्म का ध्यान रखें।
विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए बेलपत्र मिलना कठिन हो सकता है। भारतीय दुकानों या मंदिर में पूछ लें, या उपलब्ध पत्तों और फूलों से पूजा करें। सार्वजनिक नदी या झील में सामग्री न बहाएँ।
संबंधित पृष्ठ
परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।