गुजराती पंचांग
गुजराती विक्रम संवत्: अमान्त चान्द्र-सौर पंचांग, जिसका वर्ष दीपावली के अगले दिन बेस्तु वरस से शुरू होता है, और उसके बारह महीने।
यह कैसा पंचांग है
गुजराती पंचांग चान्द्र-सौर और अमान्त है। मास अमावस्या (अमास) पर पूरे होते हैं, और ऋतुओं से मेल रखने के लिए लगभग हर तीसरे वर्ष अधिक मास जुड़ता है। शुक्ल पक्ष को "सुद" और कृष्ण पक्ष को "वद" कहते हैं।
यह विक्रम संवत् ही है, पर इस साइट के मुख्य पंचांग से दो बातों में अलग है: मास अमावस्या पर समाप्त होते हैं, और वर्ष चैत्र में नहीं, कार्तिक में शुरू होता है।
संवत् और वर्ष-संख्या
संवत् विक्रम है, जो ईसा पूर्व 57 से गिना जाता है। वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (कारतक सुद 1) को, यानी दीपावली के अगले दिन बदलता है। इसे कार्तिकादि पद्धति कहते हैं। बेस्तु वरस से ईसवी वर्ष के अंत तक ईसवी वर्ष में 57 जोड़ें। ईसवी वर्ष के आरंभ से अगले बेस्तु वरस तक 56 जोड़ें।
चैत्रादि वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर ही बदल जाता है। इसलिए चैत्र से दीपावली तक गुजराती पंचांग की वर्ष-संख्या मुख्य पंचांग से एक कम दिखती है। यह दोनों के आरंभ-बिंदु का स्वाभाविक परिणाम है, त्रुटि नहीं।
बारह महीने
| क्रम | गुजराती मास | संस्कृत मास |
|---|---|---|
| 1 | कारतक | कार्तिक |
| 2 | मागशर | मार्गशीर्ष |
| 3 | पोष | पौष |
| 4 | महा | माघ |
| 5 | फागण | फाल्गुन |
| 6 | चैत्र | चैत्र |
| 7 | वैशाख | वैशाख |
| 8 | जेठ | ज्येष्ठ |
| 9 | अषाढ़ | आषाढ़ |
| 10 | श्रावण | श्रावण |
| 11 | भादरवो | भाद्रपद |
| 12 | आसो | आश्विन |
ये अमान्त नाम महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमान्त नामों से मेल खाते हैं। वर्तनी कहीं-कहीं बदलती है।
नववर्ष
बेस्तु वरस कारतक सुद 1 को, दीपावली के अगले दिन पड़ता है। नाम का अर्थ है "आरंभ होने वाला वर्ष"। लोग मंदिर जाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, "साल मुबारक" कहकर रिश्तेदारों-पड़ोसियों से मिलते हैं, और व्यापारी छोटी पूजा के साथ नए बही-खाते (चोपड़ा) खोलते हैं। कारतक सुद 1 कभी एक दिन शुरू होकर अगले दिन समाप्त होती है, इसलिए अलग-अलग पंचांग इसे अलग-अलग दिन रख सकते हैं। अपना स्थानीय पंचांग मानें।
गुजरात के विशेष पर्व
तिथियाँ वही हैं जो अन्यत्र हैं, पर ये पर्व गुजरात में विशेष हैं:
- वाघ बारस: धनतेरस से एक दिन पहले गाय-बछड़े का पूजन। गुजरात में इसी से दीपावली शुरू मानी जाती है।
- लाभ पाँचम: कारतक सुद 5, जब दीपावली के बाद व्यापार फिर खुलता है।
- उत्तरायण: मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव।
- नवरात्रि: आसो में नौ रातों का गरबा और डांडिया।
- अहमदाबाद की रथयात्रा: अषाढ़ी बीज, यानी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया।
कई गुजराती परिवार जैन, वैष्णव, शैव या स्वामीनारायण परंपरा के हैं, और सबके अपने पंचांग-निर्देश हैं।
अमान्त नाम और दिन की गणना
अमान्त पंचांग में कृष्ण पक्ष उस मास का होता है जो समाप्त हो रहा है। इसलिए गुजरात की "आसो वद 14" वही दिन है जिसे उत्तर भारत कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी कहता है। इसी कारण दीपावली गुजरात में आसो वद अमास को और उत्तर भारत में कार्तिक अमावस्या को पड़ती है।
दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना जाता है। व्रत और पर्व में पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने मंदिर का पंचांग देखें।
मुख्य पंचांग से अंतर
- मास अमावस्या पर समाप्त होते हैं, इसलिए हर कृष्ण पक्ष पिछले मास का नाम पाता है। साइट पर अमान्त नाम मुख्य पूर्णिमान्त नाम के साथ दिखता है।
- वर्ष दीपावली के बाद कार्तिक में शुरू होता है, इसलिए वर्ष-संख्या शरद ऋतु में बदलती है।
- शुक्ल पक्ष के नाम दोनों में समान हैं, इसलिए नवरात्रि आसो सुद 1 से शुरू होती है, जो मुख्य पंचांग में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा है।