अमान्त और पूर्णिमान्त मास

अमान्त मास अमावस्या पर (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) और पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा पर (उत्तर भारत) समाप्त होते हैं। दोनों में कृष्ण पक्ष का नाम अलग होता है।

मास समाप्त करने के दो तरीके

अमान्त का अर्थ है अमावस्या पर अंत होना, और पूर्णिमान्त का अर्थ है पूर्णिमा पर अंत होना। एक चन्द्र मास और अगले मास के बीच रेखा खींचने के ये दो तरीके हैं। आकाश वही रहता है; केवल नाम अलग होते हैं। अमान्त पद्धति में मास अमावस्या से अमावस्या तक का एक खंड है। पूर्णिमान्त पद्धति में मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है।

कौन-सी पद्धति कहाँ चलती है

  • पूर्णिमान्त: उत्तर भारत, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली आते हैं। यहाँ यही नाम पहले दिखाया जाता है।
  • अमान्त: गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्य। यहाँ यह नाम पूर्णिमान्त नाम के साथ दिखाया जाता है।

गुजरात का इतिहास थोड़ा अलग है। अभिलेखों के अध्ययन से पता चलता है कि वहाँ पहले पूर्णिमान्त चलता था और बाद में अमान्त सामान्य हो गया। आज गुजराती पंचांग अमान्त मास का प्रयोग करते हैं।

याद रखने लायक नियम

शुक्ल पक्ष, यानी उजला पखवाड़ा, दोनों पद्धतियों में एक ही है और उसका मास-नाम हर जगह वही रहता है।

कृष्ण पक्ष, यानी अँधेरे पखवाड़े, का मास-नाम अलग होता है। पूर्णिमान्त में यह पखवाड़ा अगले मास का हिस्सा बन चुका होता है। अमान्त में यह उसी मास का है जो समाप्त हो रहा है। इसलिए हर कृष्ण पक्ष के लिए पूर्णिमान्त नाम अमान्त नाम से एक मास आगे होता है।

शब्दों में एक उदाहरण

आश्विन की पूर्णिमा के बाद आने वाले कृष्ण पक्ष को लीजिए। अमान्त पद्धति में यह आश्विन कृष्ण पक्ष है, यानी आश्विन मास का अंतिम भाग। पूर्णिमान्त पद्धति में आश्विन मास पूर्णिमा पर पूरा हो चुका है, इसलिए वही पखवाड़ा कार्तिक कृष्ण पक्ष कहलाता है।

पखवाड़ा पूर्णिमान्त नाम अमान्त नाम
शुक्ल पक्ष वही वही
कृष्ण पक्ष अगला मास चालू मास

एक ही तिथि, वही रातें और वही चन्द्रकला दो नामों से जानी जाती हैं। कुछ परिचित अवसर देखिए:

  • करवा चौथ: पूर्णिमान्त में कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, अमान्त में आश्विन कृष्ण चतुर्थी।
  • पितृ पक्ष: उत्तर भारत में आश्विन कृष्ण पक्ष, जबकि अमान्त पंचांगों में यही भाद्रपद कृष्ण पक्ष है।
  • दीपावली: पूर्णिमान्त में कार्तिक अमावस्या, अमान्त में आश्विन अमावस्या।
  • महाशिवरात्रि: पूर्णिमान्त में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, अमान्त में माघ कृष्ण चतुर्दशी।

क्या पर्व का दिन बदलता है

नहीं। दिन तिथि और चन्द्रमा से तय होता है, और इस पर दोनों पद्धतियाँ सहमत हैं। यदि गुजराती मित्र और उत्तर प्रदेश के मित्र कृष्ण पक्ष के किसी त्योहार का अलग-अलग मास बताएँ, तो अधिकतर वे एक ही दिन की बात कर रहे होते हैं। शुक्ल पक्ष के पर्वों, जैसे रामनवमी, गणेश चतुर्थी और नवरात्र, का मास-नाम सब क्षेत्रों में एक ही है।

नववर्ष और नाम कैसे दिखते हैं

मास-पद्धति और नववर्ष दो अलग विकल्प हैं। अधिकांश भारत में वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, और गुजरात का कार्तिकादि वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से। दोनों शुक्ल पक्ष में पड़ते हैं, इसलिए दोनों पद्धतियों में उनका नाम एक ही रहता है।

यहाँ हर तारीख पर पहले पूर्णिमान्त नाम आता है, फिर कोष्ठक में अमान्त नाम, और साथ में पक्ष तथा तिथि। कृष्ण पक्ष की तारीख ऐसी दिखेगी: पहले "कार्तिक कृष्ण चतुर्थी", और उसके नीचे "(आश्विन कृष्ण चतुर्थी) अमान्त"। शुक्ल पक्ष में दोनों नाम एक ही होते हैं।

आप किसे मानें

अपने समुदाय या मंदिर की पद्धति मानिए। गुजरात, महाराष्ट्र या दक्षिण से आकर दूसरे प्रांत या विदेश में बसे परिवार प्रायः अमान्त नामों के आदी होंगे; उत्तर भारत के परिवार प्रायः पूर्णिमान्त के।

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