पंचांग के पाँच अंग
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण: पंचांग का हर अंग क्या मापता है, कितने प्रकार का होता है और कितनी देर चलता है।
एक क्षण, पाँच वर्णन
हर क्षण की एक तिथि, एक वार, एक नक्षत्र, एक योग और एक करण होता है। यही पाँच अंग मिलकर पंचांग बनाते हैं। तिथि और करण सूर्य और चन्द्रमा के बीच के कोण से निकलते हैं, नक्षत्र तारों के बीच चन्द्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य और चन्द्रमा की स्थितियों के जोड़ से। वार सीधे सप्ताह का दिन है।
| अंग | अर्थ | संख्या | क्या मापता है |
|---|---|---|---|
| तिथि | चन्द्र दिवस | 30 | चन्द्रमा जितनी देर में सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है |
| वार | सप्ताह का दिन | 7 | सूर्योदय से गिना जाने वाला दिन और उसका स्वामी ग्रह |
| नक्षत्र | चन्द्रमा का तारा-समूह | 27 | राशिचक्र का हर 13 अंश 20 कला का भाग |
| योग | सूर्य और चन्द्रमा का मेल | 27 | दोनों की स्थितियों के जोड़ का हर 13 अंश 20 कला |
| करण | आधी तिथि | 11 प्रकार (एक चन्द्र मास में 60) | चन्द्रमा जितनी देर में सूर्य से 6 अंश आगे बढ़ता है |
पाँचों अंग संक्षेप में
- तिथि। सबसे पहले यही देखी जाती है, क्योंकि व्रत और त्योहार तिथि से तय होते हैं।
- वार। सात शास्त्रीय ग्रहों के नाम पर सात दिन। इस कालगणना में वार आधी रात से नहीं, सूर्योदय से बदलता है।
- नक्षत्र। राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक किसी तारा-समूह के नाम पर। चन्द्रमा जिस भाग में हो, वही उस समय का नक्षत्र है।
- योग। सूर्य और चन्द्रमा की राशिचक्र में स्थितियाँ (अंशों में) जोड़ें; जोड़ का हर 13 अंश 20 कला एक योग है, कुल 27।
- करण। आधी तिथि। एक चन्द्र मास में 60 करण-काल आते हैं, जो 11 नामों से भरे जाते हैं।
नक्षत्र और योग निरयन राशिचक्र पर नापे जाते हैं, जो स्थिर तारों से बँधा है। खगोल-विज्ञान की सायन स्थितियों को निरयन में बदलने के लिए यहाँ लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश लिया जाता है। तिथि और करण केवल सूर्य-चन्द्रमा के कोण पर टिके हैं, इसलिए अयनांश से उन पर असर नहीं पड़ता।
हर अंग का अपना समय
तिथि, नक्षत्र, योग और करण न सूर्योदय पर बदलते हैं, न आधी रात को; वे किसी भी घड़ी शुरू और खत्म हो सकते हैं। कोई तिथि दोपहर 3:20 बजे आरंभ होकर अगले दिन शाम 4:05 बजे तक चल सकती है। इसीलिए हर एक का ठीक आरंभ और अंत आपके शहर के स्थानीय समय में दिखाया जाता है।
दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय पर जो तिथि चल रही हो, उसी के नाम से दिन जाना जाता है। यह "सूर्योदय आधारित दिन" और "उदया तिथि नियम" के पृष्ठों में समझाया गया है।
किस अंग से क्या तय होता है
- व्रत और त्योहार मुख्यतः तिथि से तय होते हैं; कभी-कभी नक्षत्र या वार भी देखा जाता है।
- जन्म-नक्षत्र, नामकरण और अनेक पारिवारिक संस्कारों में नक्षत्र का उपयोग होता है।
- शुभ मुहूर्त चुनते समय पाँचों अंग देखे जाते हैं, और साथ में राहुकाल जैसे समय भी।
सब नाम एक साथ याद रखने की चिंता न करें। यहाँ किसी भी दिन के पाँचों अंग दिखाए जाते हैं, और अलग-अलग पृष्ठ उन्हें एक-एक करके समझाते हैं।