मलयालम पंचांग
केरल का कोल्लम संवत् वाला सौर पंचांग: चिंगम से कर्कटकम तक बारह महीने, दो नववर्ष और विक्रम संवत् से अंतर।
यह कैसा पंचांग है
केरल और विदेश में बसे मलयाली समुदायों का पंचांग निरयन सौर है। सूर्य जिस दिन नई राशि में जाता है, उस दिन नया मास लगता है। मासों के नाम राशियों के मलयालम रूप हैं।
पंचांग में चान्द्र तिथियाँ भी हैं और मंदिरों के कई उत्सव उन पर चलते हैं। पर केरल के दैनिक जीवन में सौर मास और नक्षत्र (जन्म का तारा) अधिक मायने रखते हैं। जन्मदिन अक्सर जन्म-नक्षत्र से मनाए जाते हैं, और ओणम स्वयं चिंगम मास में तिरुवोणम (श्रवण) नक्षत्र का दिन है।
संवत् और वर्ष-संख्या
संवत् कोल्लम संवत् (कोल्लम आंदु) है, जो ईसवी सन् 825 से गिना जाता है। इसके आरंभ के कारण पर स्रोत भिन्न हैं। एक विवरण इसे राजा कुलशेखर के समय कोल्लम में हुई बड़ी सभा से जोड़ता है, दूसरा कोल्लम नगर की स्थापना से, और कुछ विवरणों में लोककथाएँ भी हैं। कोई एक मत निर्णायक नहीं है।
वर्ष चिंगम 1 को बदलता है। ईसवी वर्ष के आरंभ से चिंगम 1 तक ईसवी वर्ष में 825 घटाएँ। चिंगम 1 से वर्ष के अंत तक 824 घटाएँ।
बारह महीने
| क्रम | मलयालम मास | राशि |
|---|---|---|
| 1 | चिंगम | सिंह |
| 2 | कन्नि | कन्या |
| 3 | तुलाम | तुला |
| 4 | वृश्चिकम | वृश्चिक |
| 5 | धनु | धनु |
| 6 | मकरम | मकर |
| 7 | कुंभम | कुंभ |
| 8 | मीनम | मीन |
| 9 | मेडम | मेष |
| 10 | एडवम | वृषभ |
| 11 | मिथुनम | मिथुन |
| 12 | कर्कटकम | कर्क |
मास की लंबाई हर वर्ष बदलती है, लगभग 29 से 32 दिन।
दो नववर्ष
केरल में दो नववर्ष-दिन हैं और दोनों मनाए जाते हैं।
- चिंगम 1: कोल्लम वर्ष का आरंभ, जिसे राज्य सरकार मलयालम नववर्ष मानती है।
- विशु: मेडम 1 को, जब सूर्य मेष राशि में जाता है। कुछ विवरण कहते हैं कि चिंगम 1 अपनाए जाने से पहले विशु ही वर्ष का आरंभ था। अनेक परिवार इसे आज भी भावना से नववर्ष मानते हैं। इस दिन विशुक्कणि (शुभ प्रथम दर्शन), उपहार और भोज होता है।
केरल के विशेष पर्व
मास सौर हैं और नक्षत्र का महत्व है, इसलिए यहाँ के पर्व चान्द्र पंचांग से अलग बैठते हैं।
- ओणम: चिंगम में तिरुवोणम नक्षत्र के दिन, केरल का महान फसल पर्व।
- कर्कटकम: वर्षा का मास, जिसमें अनेक घरों में रामायण का पाठ होता है। इस मास की अमावस्या, कर्कटक वावु, पितरों को अर्पण का दिन है।
- वृश्चिकम 1: मंडल काल का आरंभ, शबरिमला की मुख्य तीर्थयात्रा का समय।
- तिरुवातिरा: धनु मास में स्त्रियों का उत्सव, गीतों और गोल नृत्य के साथ।
दीपावली और नवरात्रि चान्द्र हैं, और मलयाली इन्हें सामान्य तिथियों पर मनाते हैं। केरल की नवरात्रि में अंतिम दिनों में पुस्तकों और वाद्ययंत्रों का पूजन होता है, फिर विद्यारंभ, जब बच्चे पहली बार लिखना शुरू करते हैं।
दिन की गणना
दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है। मास का पहला दिन राशि-प्रवेश का दिन माना जाए या अगला, यह एक नियम तय करता है, जो इस पर टिका है कि सूर्य दिन के किस समय राशि की सीमा पार करता है। इसलिए दो छपे मलयालम पंचांग एक दिन भिन्न हो सकते हैं। अपने परिवार या मंदिर का पंचांग मानें।
मुख्य पंचांग से अंतर
- मलयालम मास सौर हैं और राशि-प्रवेश पर शुरू होते हैं, अमावस्या या पूर्णिमा पर नहीं।
- कोल्लम संवत् अलग गिनती है, जो ईसवी वर्ष से 824 या 825 पीछे चलती है।
- मलयालम वर्ष चिंगम में शुरू होता है, जबकि विक्रम संवत् चैत्र में।
महाशिवरात्रि जैसे चान्द्र पर्वों के लिए वही तिथि चलती है, इसलिए मुख्य पंचांग देखा जा सकता है। ओणम और विशु के लिए मलयालम पंचांग की सौर तिथि और नक्षत्र देखें।