तिरुनल्लारु और तमिल तर्पण तीर्थ, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी

Tirunallar and the Tamil tirthas for Tarpan

तिरुनल्लारु शनि मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, पितृ कर्म के लिए नहीं; यह पृष्ठ कावेरी तट, रामेश्वरम और तिलतर्पणपुरी की तमिल तर्पण परंपरा बताता है।

राज्य: तमिलनाडु और पुदुच्चेरी (कारईकाल)नदियाँ: कावेरी, रामेश्वरम में अग्नि तीर्थम् का समुद्र तटअनुष्ठान: तर्पणम् (तर्पण), श्राद्ध, पिंडदान
सर्वोत्तम समय: तमिल मास आडि, पुरट्टासी (महालया) और तै की अमावस्या मुख्य दिन हैं; जनवरी से मार्च सबसे आरामदायक है, जबकि अप्रैल से जून में गर्मी और अक्टूबर से दिसंबर में पूर्वोत्तर मानसून की भारी बारिश होती है।

इस स्थान का महत्व

तिरुनल्लारु पुदुच्चेरी संघ राज्य क्षेत्र के कारईकाल जिले में है, जो तमिलनाडु के तट पर बसा है। यह दर्भारण्येश्वर (शिव) मंदिर और उसमें शनि (शनीश्वर) के स्थान के लिए प्रसिद्ध है, जिसके साथ नल तीर्थम् सरोवर भी है। वहाँ की मान्यता में राजा नल की कथा जुड़ी है, जो शनि के प्रभाव से मुक्त हुए थे। तिरुनल्लारु में अपने आप में पितृ कर्म की कोई स्थापित परंपरा व्यापक रूप से प्रलेखित नहीं है। इसलिए इस पृष्ठ में तिरुनल्लारु का उल्लेख संक्षेप में है, और फिर तमिल क्षेत्र की तर्पण और श्राद्ध की व्यापक परंपरा बताई गई है, जो इस क्षेत्र का अच्छी तरह प्रलेखित भाग है।

तमिल घरों में तर्पण को तर्पणम् कहते हैं (तिल और जल से पितरों को अर्पण)। बहुत से परिवारों में यह हर अमावस्या पर किया जाता है, और वर्ष के तीन दिन विशेष श्रद्धा से मनाए जाते हैं: आडि अमावस्या, पुरट्टासी मास की महालया अमावस्या और तै अमावस्या। इन दिनों नदियों और समुद्र तट पर भारी भीड़ होती है। परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।

यहाँ की विधियाँ

  • कावेरी के तट: परिवार नदी में स्नान करके श्रीरंगम के अम्मा मंडपम और तिरुवैयारु के तट जैसे घाटों पर तर्पण करते हैं। समाचारों में आडि अमावस्या पर इन स्थानों पर बहुत बड़े जमावड़े का वर्णन मिलता है।
  • रामेश्वरम: अग्नि तीर्थम् का समुद्र तट तर्पण और पिंडदान का बड़ा स्थान है, विशेषकर तमिल अमावस्या के दिनों में। रामेश्वरम वाला लेख देखें।
  • तिलतर्पणपुरी: मुक्तीश्वरर मंदिर, तिलतर्पणपुरी, कूथनूर के पास, मयिलादुतुरै से तिरुवारूर के मार्ग पर बताया जाता है। स्थानीय परंपरा इसे श्री राम द्वारा पिता दशरथ के लिए किए गए कर्म से जोड़ती है। नाम में तिल (तिल से तर्पण) का संकेत है। जिले और मंदिर के सही नाम को लेकर स्रोतों में अंतर है (अधिकतर स्रोत तिरुवारूर जिला बताते हैं), इसलिए जाने से पहले स्थान की पुष्टि कर लें।
  • तिरुनल्लारु: शनीश्वर के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु चाहें तो उसी यात्रा में तर्पण भी कर सकते हैं, पर तिरुनल्लारु में पितृ कर्म की कोई स्थापित परंपरा प्रलेखित नहीं है।

सामान्य विधि के लिए तर्पण विधि और श्राद्ध के दिन वाले लेख देखे जा सकते हैं। तमिल ब्राह्मण और अन्य समुदाय अपने-अपने क्रम और सूत्रों का पालन करते हैं, इसलिए अपने कुल पुरोहित का बताया रूप ही निभाएँ।

सबसे अच्छा समय

परंपरागत अवसर। आडि अमावस्या, महालया अमावस्या और तै अमावस्या तीन बड़े दिन हैं। हर मास की अमावस्या भी बहुत से परिवार मनाते हैं। मकर संक्रांति और कुछ अन्य दिन कुछ घरों में मनाए जाते हैं।

यात्रा का मौसम। जनवरी से मार्च सबसे आरामदायक है, दिन गुनगुने और रातें हल्की ठंडी। अप्रैल से जून तक गर्मी और उमस रहती है। लगभग अक्टूबर से दिसंबर का पूर्वोत्तर मानसून डेल्टा और तट पर भारी बारिश, बाढ़ और चक्रवात ला सकता है, जिससे सड़कें और समुद्र तक पहुँच बंद हो सकती है। बड़ी अमावस्याओं पर घाट और मंदिर बेहद भीड़ वाले होते हैं। कावेरी का प्रवाह साल भर बदलता रहता है; गर्मियों में कम और बारिश के बाद अधिक हो सकता है।

यात्रा की तैयारी

तमिलनाडु और कारईकाल क्षेत्र में बहुत से पुरोहित (वाध्यार) हैं जो नदी और मंदिर के घाटों पर तर्पण और श्राद्ध कराते हैं। नाम के लिए अपने कुल पुरोहित या रिश्तेदारों से पूछें।

  • किसी आधिकारिक या भरोसेमंद माध्यम से बात करें, और कर्म से पहले उसका दायरा तथा दक्षिणा (पुरोहित को दी जाने वाली भेंट) तय कर लें। घाटों और मंदिर के द्वारों पर दलालों से सावधान रहें।
  • समय: तर्पण में एक-दो घंटे लगते हैं, और पूरे श्राद्ध में एक सुबह। कई स्थान देखने हों तो कई दिन लगेंगे।
  • पहुँचना: तिरुनल्लारु कारईकाल शहर से कुछ किलोमीटर दूर बताया जाता है, और कारईकाल में रेलवे स्टेशन है। डेल्टा क्षेत्र के लिए तिरुचिरापल्ली मुख्य निकट का हवाई अड्डा है; श्रीरंगम और तिरुवैयारु तिरुचिरापल्ली और तंजावुर के पास हैं। रामेश्वरम के लिए रामेश्वरम वाला लेख देखें।
  • साथ रखें: स्नान योग्य कपड़े और बदलने के कपड़े, तौलिया, चप्पल, टोपी और पानी। तमिलनाडु के मंदिरों में अक्सर वस्त्र संबंधी नियम होते हैं, इसलिए जाने से पहले पूछ लें।

व्यावहारिक सुझाव

  • अमावस्या के दिनों घाट भीड़ भरे और फिसलन वाले होते हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों को पास रखें और तेज़ पानी में तैरने से बचें।
  • बड़े दिनों के लिए श्रीरंगम, रामेश्वरम और कारईकाल में कमरे जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुक करें।
  • आधिकारिक जानकारी तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मादाय विभाग, कारईकाल के लिए पुदुच्चेरी सरकार और जिला प्रशासनों से मिल सकती है।
  • अमावस्या की तिथि किसी तमिल पंचांग या मंदिर की सूचना से मिला लें; यह साइट आपके स्थान के लिए इसकी गणना करती है।

संबंधित पृष्ठ