हनुमान जयंती

Hanuman Jayanti

उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला हनुमान जी का जन्मोत्सव, जिसमें चालीसा पाठ, सिंदूर और बल व भक्ति की प्रार्थना होती है।

देवता: श्री हनुमानअवधि: एक दिनऋतु: वसंत ऋतुअन्य नाम: हनुमान जन्मोत्सव

वाराणसी के लिए दिखाया गया; पृष्ठ के ऊपर से अपना शहर चुनें।

तारीख़पर्व या अवसर
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026हनुमान जयंती
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027हनुमान जयंती
रविवार, 9 अप्रैल 2028हनुमान जयंती

परिचय

हनुमान जयंती भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी के जन्म का उत्सव है, जिन्हें बल, साहस, विनम्रता और अटूट भक्ति के लिए जाना जाता है। उत्तर भारत के अधिकांश भागों में यह चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, राम नवमी के कुछ ही दिन बाद। पूर्णिमा का मास-नाम पूर्णिमान्त और अमान्त दोनों गणनाओं में एक ही है। परंपरा में हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय माना गया है, इसलिए मुख्य पूजन सूर्योदय के आसपास होता है। जब पूर्णिमा दो दिनों में फैली हो, तब प्रायः उस दिन का चुनाव होता है जिसमें सूर्योदय के समय पूर्णिमा हो। अपने शहर की गणना की हुई तिथि देख लें।

दूसरे क्षेत्रों में दिन अलग हैं। तमिलनाडु और केरल में हनुमत जयंती मार्गली (धनु) मास की अमावस्या को मूल नक्षत्र के साथ आती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की 41 दिन की हनुमान दीक्षा वैशाख कृष्ण दशमी (अमान्त गणना; पूर्णिमान्त में ज्येष्ठ कृष्ण दशमी) को पूरी होती है। कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को हनुमद्व्रत मनाया जाता है, और कुछ परंपराएँ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमान्त गणना; यही नरक चतुर्दशी का दिन है) को भी जन्मोत्सव मानती हैं। अपने परिवार और स्थानीय मंदिर की रीति देखें।

महत्व और कथाएँ

हनुमान जी अंजना और केसरी के पुत्र हैं और वायु देव के पुत्र भी कहलाते हैं, इसीलिए उन्हें पवनपुत्र, आंजनेय और मारुति कहा जाता है। कथा है कि बचपन में उन्होंने सूर्य को फल समझकर उसकी ओर छलाँग लगा दी थी। आगे चलकर राम के सबसे बड़े भक्त के रूप में उन्होंने समुद्र लाँघकर लंका में सीता जी को खोजा, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी पर्वत उठाया और पूरी विनम्रता से प्रभु राम की सेवा की।

वे निःस्वार्थ सेवा, भय के सामने साहस और बिना अहंकार की भक्ति के प्रतीक हैं। तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली प्रार्थना है; इसमें चालीस चौपाइयाँ हैं और यह अवधी भाषा में है। रामायण का सुंदरकांड भी उनकी स्तुति में पढ़ा जाता है।

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें, बहुत से लोग लाल या केसरिया। दिन का संकल्प लें।
  2. साफ़ कपड़े पर हनुमान जी की प्रतिमा, चित्र या राम दरबार रखें।
  3. चमेली या तिल के तेल में मिला सिंदूर, लाल फूल, माला, तुलसी दल और अक्षत अर्पित करें। कई स्थानों पर चोला चढ़ाने की रीति है।
  4. दीप और धूप जलाएँ। फल, बूँदी के लड्डू या गुड़-चना चढ़ाएँ, और परंपरा हो तो पान का बीड़ा भी।
  5. हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या हनुमान अष्टक का पाठ करें और "ॐ हनुमते नमः" का जप करें। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।
  6. आरती करें और प्रसाद बाँटें।
  7. कुछ मंदिरों में महिलाओं के लिए प्रतिमा को छूने या सिंदूर चढ़ाने की मनाही होती है, जबकि कुछ में अनुमति रहती है। अपने परिवार की परंपरा और मंदिर के पुजारी की सलाह मानें।

पूजन सामग्री

  • हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र
  • सिंदूर, चमेली या तिल का तेल और लाल वस्त्र
  • लाल फूल, गेंदे की माला और तुलसी दल
  • बूँदी के लड्डू, गुड़-चना, केले और अन्य फल
  • पान का बीड़ा, नारियल, दीप, धूप और कपूर
  • हनुमान चालीसा की पुस्तक

व्रत और भोजन

बहुत से भक्त पूजा होने तक उपवास रखते हैं और संध्या प्रार्थना के बाद सादा भोजन करते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फल और दूध पर रहते हैं और कुछ केवल एक समय भोजन करते हैं। सात्त्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है, और व्रत रखने वाले प्याज़, लहसुन, मांस और शराब से दूर रहते हैं। उपवास व्यक्ति की अपनी पसंद है। बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग उपवास तभी रखें जब चिकित्सक अनुमति दें।

क्या करें

  • सुबह जल्दी उठें और सूर्योदय के आसपास प्रार्थना करें।
  • हनुमान चालीसा को अर्थ समझते हुए पढ़ें।
  • बड़ों का आशीर्वाद लें और हो सके तो मंदिर जाएँ।
  • सेवा करें, क्योंकि यही हनुमान जी की सबसे बड़ी सीख है: किसी को भोजन कराएँ, पड़ोसी की मदद करें।
  • परिवार और मित्रों में प्रसाद बाँटें।
  • दिन शांत रखें और क्रोध से बचें।

क्या न करें

  • व्रत रखने वाले मांस, अंडे और शराब का सेवन न करें।
  • अपने बल या भक्ति का घमंड न करें।
  • अशुद्ध हाथों से प्रतिमा को न छुएँ।
  • मंदिर के नियमों के विरुद्ध कोई वस्तु न चढ़ाएँ।
  • बंदरों को चिढ़ाएँ या सताएँ नहीं। उन्हें भोजन केवल वहीं दें जहाँ अनुमति हो, क्योंकि वे आक्रामक हो सकते हैं।

क्षेत्रीय परंपराएँ

  • उत्तर भारत: शोभायात्राएँ, सुंदरकांड पाठ और हनुमान मंदिरों पर मेले, जैसे राजस्थान में सालासर और मेहंदीपुर। अयोध्या की हनुमानगढ़ी और काशी का संकट मोचन मंदिर भक्तों से भर जाते हैं; संकट मोचन में हनुमान जयंती के आसपास प्रसिद्ध संगीत समारोह भी होता है।
  • महाराष्ट्र: सूर्योदय के समय जन्मोत्सव और कीर्तन।
  • तमिलनाडु और केरल: मार्गली मास में; नामक्कल जैसे मंदिरों में हनुमान जी को वड़ों की माला चढ़ती है।
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: पर्व से पहले 41 दिन की हनुमान दीक्षा।
  • ओडिशा: मेष संक्रांति (पणा संक्रांति) के आसपास कुछ स्थानों पर हनुमान पूजन।

परंपराएँ अलग-अलग हैं; अपने परिवार की रीति या स्थानीय मंदिर की सलाह मानें।

आज के समय में

मुख्य पूजा सूर्योदय के समय है, इसलिए दफ़्तर जाने से पहले छोटी प्रार्थना भी काफ़ी है: दीप जलाएँ, एक फूल चढ़ाएँ और चालीसा पढ़ें। सरसों या तिल के तेल और सिंदूर के दाग़ कपड़ों और फ़र्श पर लग सकते हैं, इसलिए थाली और साफ़ कपड़ा बिछा लें। फ़्लैट में धूप या कपूर जलाने से पहले धुआँ-अलार्म का ध्यान रखें।

कई मंदिर और हाउसिंग सोसायटी सामूहिक चालीसा पाठ रखते हैं, कहीं-कहीं 108 बार। यह बच्चों को साथ जोड़ने का सहज तरीक़ा है। विदेश में रहने वाले परिवारों को बूँदी के लड्डू और केले भारतीय दुकानों में मिल जाते हैं।

संबंधित पृष्ठ

परंपराएँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यह पृष्ठ प्रचलित रीति बताता है; अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को ही मानें।

कोई तिथि न चूकें

इस पर्व और अपने चुने हुए अन्य पर्वों से पहले, आपके शहर के अनुसार, ईमेल पाएँ।

रिमाइंडर पाएँ