घर या संपत्ति खरीदने का मुहूर्त

घर, फ़्लैट या ज़मीन के बयाने, रजिस्ट्री और कब्ज़े के लिए शुभ समय चुनने की पारंपरिक जानकारी और उसे सरकारी तारीख़ों से मिलाने के सुझाव।

शुभ दिन खोजे जा रहे हैं…

यह कार्य क्या है

घर या संपत्ति खरीदना परिवार के जीवन का बड़ा कदम है। आम तौर पर इसके तीन क्षण गिने जाते हैं: बयाना यानी अग्रिम राशि देना, बैनामे (विक्रय-पत्र) पर हस्ताक्षर और रजिस्ट्री, और कब्ज़ा लेना यानी चाबी मिलना। नए घर में पहली बार प्रवेश का अनुष्ठान गृह प्रवेश कहलाता है; उसका मुहूर्त अलग से देखा जाता है।

शास्त्रीय मार्गदर्शन

यहाँ स्थायी कार्यों के आरंभ के वे सामान्य नियम लिए गए हैं जो मुहूर्त चिन्तामणि और मुहूर्त मार्तण्ड जैसे ग्रंथों की परंपरा में चलते हैं। सूचियाँ अलग-अलग हैं; यहाँ सबसे प्रचलित सूची दी गई है।

अनिवार्य

  • ग्रहण, पितृ पक्ष, अधिक मास, खरमास, गुरु अस्त और शुक्र अस्त से बचें। बृहस्पति स्थायी वृद्धि का और शुक्र सुख-संपत्ति का कारक माना जाता है।
  • हस्ताक्षर या भुगतान के क्षण में भद्रा और राहुकाल न हों।

प्रबल रूप से अपेक्षित

  • नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, उत्तर भाद्रपद और रेवती। रोहिणी और तीनों उत्तर नक्षत्र ध्रुव (स्थिर) हैं, इसलिए टिकाऊ कार्यों में सराहे जाते हैं। भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, ज्येष्ठा और मूल से बचें।
  • तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या से बचें।
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ है।

श्रेष्ठ

  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार। गुरुवार स्थायी समृद्धि से जुड़ा है; मंगलवार और शनिवार से कई परिवार बचते हैं।
  • मास: कोई मास वर्जित नहीं। चातुर्मास में कई परिवार बड़ा सौदा नहीं करते, इसलिए अपने घर की रीति पूछ लें।
  • समय: स्थानीय दोपहर के आसपास अभिजित मुहूर्त, या राहुकाल से बाहर प्रातःकाल।

इस पृष्ठ की शुभ दिनों की सूची केवल शुक्ल पक्ष के उन दिनों को दिखाती है जो सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार को पड़ते हैं; रविवार भी उसमें नहीं है। ऊपर के वर्जित काल, तिथियाँ और नक्षत्र उसमें हमेशा बाहर रहते हैं, पर चातुर्मास बाहर नहीं रखा गया है।

तैयारी और पूजा की रूपरेखा

  1. तय करें कि कौन-सा क्षण आपके लिए मुख्य है, और उसी का मुहूर्त देखें।
  2. हस्ताक्षर से पहले गणेश जी और इष्टदेव का स्मरण करें। गंगाजल हो तो कुछ बूँदें फ़ाइल के आवरण पर छिड़कें।
  3. कागज़ों को साफ़ फ़ाइल में रखें, उस पर रोली का छोटा तिलक लगाएँ और परिवार का मुँह मीठा कराएँ।
  4. कब्ज़ा मिलने पर घर में दीप जलाएँ, नारियल और मिठाई चढ़ाएँ।

चाहें तो ॐ गं गणपतये नमः का जप करें। सही उच्चारण के लिए किसी विद्वान या पुरोहित से पूछ लें।

क्या करें और क्या न करें

  • सब कागज़ शांत मन से पढ़कर ही हस्ताक्षर करें; जो बात समझ में न आए, उस पर शुभ समय के कारण हस्ताक्षर न करें। कानूनी और वित्तीय सलाह की अनदेखी न करें।
  • तारीख़ पूरी तरह ठीक न बैठे, तो अच्छा सौदा न टालें, और ज्योतिष के भय से दबाव में खरीदारी न करें।
  • किसी दूसरे शहर का मुहूर्त न लें; अपने शहर का समय देखें।

भारत में योजना कैसे बनाएँ

रजिस्ट्री की तारीख़ उप-पंजीयक कार्यालय की व्यवस्था, स्टांप शुल्क के भुगतान और बैंक की ऋण-स्वीकृति पर निर्भर करती है, और बिल्डर से कब्ज़े की तारीख़ भी अक्सर आपके हाथ में नहीं होती। चुनने की छूट हो, तभी शुभ दिन लें; नहीं तो अनुबंध या कार्यालय की तारीख़ ही मानें। कार्यालय से लौटकर घर या भूखंड पर दीप जलाकर प्रार्थना की जा सकती है। फ़्लैट में दीप या कपूर काफ़ी है; खुली अग्नि न जलाएँ। परिवार के लोग दूसरे शहरों में हों, तो उन्हें वीडियो कॉल से जोड़ लें।

विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए तारीख़ें वहाँ के वकील, बैंक और संपत्ति-कार्यालय तय करते हैं। चाबी मिलने के दिन अपने शहर के सूर्योदय पर आधारित शुभ समय में घर पर छोटी पूजा कर लें।

यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। व्यक्तिगत मुहूर्त योग्य ज्योतिषी परिवार की कुण्डलियों से बनाते हैं।

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